कल जब फिर सुबह होगी के प्रकाशन का उद्देश्य भी यही है। इस ग्रंथ से लोकभाषा के विकास का एक द्वार भी खुलता है। जो लोग गढ़वाली के कठिन शब्दों को देखते हुए उन पर विमर्श करने से संकोच करते हैं, उनके लिए यह प्रवेशिका भी है और पाणिनी का व्याकरण भी। जो लोग गढ़वाली के कठिन शब्दों को देखते हुए उन पर विमर्श करने से संकोच करते हैं, उनके लिए यह प्रवेशिका भी है और पाणिनी का व्याकरण भी।
नेगी को भूपेन हजारिका और बॉब डिलन के समकक्ष रखा
रयाल का गहन अध्ययन दर्शाता है कि उन्होंने नेगी की रचनाओं की विषय वस्तु की विराटता को पिछली सदी के दो बड़े महान गायकों भूपेन हजारिका और बॉब डिलन के समकक्ष पाते हैं। इन तीनों ने अपने गीत, संगीत और गायन से सिर्फ लोकरंजन नहीं किया बल्कि तीनों अपने अपने समाज के प्रतिनिधि स्वर बने हैं।
प्रवास में रह रहे लोग हों या साहित्य में शोध कर रहे शोधार्थी, गांव की बहू बेटियां, दाना सयाना, नौकरीपेशा या विद्यार्थी या कोई और, हर किसी के लिए ललित मोहन रयाल ने नवनीत परोसा है। रयाल ने इस ग्रंथ में नेगी की रचना संसार को आठ वर्गों में बांटा है। संबंधित कुल 101 गीतों की बेहद सरल व्याख्या की है।
-प्रस्तुति- दिनेश शास्त्री