इस विधानसभा सीट पर करीब सवा लाख मतदाताओं में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला। इसकी वजह चुनाव में मोदी की लहर थी। हरीश रावत ने भी अपनी हार के पीछे मोदी लहर ही माना और सक्रियता नहीं छोड़ी। किसी ने किसी बहाने वह हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता बनी रही।
10 मार्च को प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। तीरथ रावत की कैबिनेट में स्वामी यतीश्वरानंद गन्ना राज्य मंत्री बने। सरकार के नेतृत्व परिवर्तन से भाजपा का एक धड़ा कमजोर पड़ गया। हरीश रावत की सक्रियता भी अचानक थम सी गई। हालांकि, इस अवधि में कोरोना का कहर भी रहा।
अचानक नेतृत्व परिवर्तन के साथ सरकार की बागडोर पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आ गई। इससे स्वामी राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट बन गए। इससे खेमों में बंटे भाजपाई चित हो गए हैं। हालांकि, कद बढ़ने के साथ स्वामी यतीश्वरानंद की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। 2022 के शुरूआत में चुनाव होने हैं। स्वामी के पास वक्त कम और जनता के प्रति जवाबदेही अधिक है।