सुबह 5 .00 बजे - बदरीनाथ जी का अभिषेक और फूलों से शृंगार।
सुबह 6.00 बजे - बदरीनाथ जी की पूजा शुरू हुई।
सुबह 6.30 बजे - आम श्रद्धालुओं ने किए बदरीनाथ के दर्शन।
सुबह 10.00 बजे - धर्माधिकारी व वेदपाठियों ने गुप्त मंत्रों का वाचन किया।
अपराह्न 2.30 बजे- मुख्य पुजारी रावल ने स्त्री वेश धारण कर मां लक्ष्मी को गर्भगृह में विराजमान किया।
शाम 4 बजे - बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई।
शाम 6 बजकर 40 मिनट: रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने भगवान बदरीनाथ से छह माह के लिए विदा मांगी।
शाम 6 बजकर 45 मिनट: शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट हुए बंद।