पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तराखंड में अब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तर्ज पर सकल पर्यावरणीय उत्पाद (जीईपी) का आकलन भी हो सकेगा। बीती छह दिसंबर को धामी कैबिनेट ने इस पर मुहर लगाई थी। शासन की ओर से अब इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस अधिसूचना के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जो जीडीपी के साथ जीईपी का आकलन भी करेगा।
अधिसूचना जारी
अपर मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण आनंद बर्द्धन की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना के अनुसार जीडीपी एक विशिष्ट समयावधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल बाजार मूल्य का आकलन करता है। यह अर्थव्यवस्था में पर्यावरण (प्राकृतिक पूंजी, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं) के योगदान, प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव और आर्थिक गतिविधियों के नकारात्मक कारकों से उत्पन्न पर्यावरणीय लागत का आकलन नहीं करता है। साफ है कि यह जीडीपी की वास्तविक तस्वीर को प्रदर्शित नहीं करता। अब जीईपी का आकलन होने पर अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के मध्य बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा।
अधिसूचना के अनुसार उत्तराखंड उच्च पारिस्थितिक संवेदनशीलता वाला प्राकृतिक संसाधन समृद्ध राज्य है। इसके दृष्टिगत राज्य के विकास एजेंडे में पर्यावरणीय चिंता का निदान जरूरी है। ऐसे में जीईपी का आकलन प्रासंगिक है। यह ऐसा माप है, जो पर्यावरण के साथ ही अर्थव्यवस्था की सभी सकारात्मक, नकारात्मक क्रियाओं को ध्यान में रखता है। साथ ही पर्यावरण पर अर्थव्यवस्था के प्रभावों और अर्थव्यवस्था में पर्यावरण के योगदान का आकलन करता है।
ऐसे होगा जीईपी का आकलन, फार्मूला तय
जीईपी के आकलन को फार्मूला भी तय किया गया है। इसके अनुसार पारंपरिक जीडीपी (वस्तुओं व सेवाओं का मूल्य) और पर्यावरणीय वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य को जोड़कर इसमें से पर्यावरणीय लागत घटाई जाएगी। अधिसूचना के अनुसार जीईपी के आकलन को व्यापक ढांचा विकसित किया जाएगा। जो यएनसीईईए की ओर से परिभाषित व पर्यावरण आर्थिक लेखा प्रणाली के अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानको के अनुरूप होगा। इसके साथ ही जीईपी को मौजूदा जीडीपी मूल्याकंन पद्धति और मौजूदा राष्ट्रीय लोखा ढांचे के साथ एकीकृत करने के लिए एसएनए (सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट) के मानकों का पालन करेगा।
डॉ.अनिल जोशी ने उठाया था मामला
पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ.अनिल प्रकाश जोशी ने वर्ष 2010 में पहली बार जीईपी का मुद्दा उठाया था। राज्य में जीईपी लागू करने के लिए उन्होंने जनहित याचिका दायर कर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। सरकार ने वर्ष 2018 में जीईपी को लेकर न्यायालय में हलफनामा दिया और हामी भरी। तत्कालीन प्रमुख सचिव वन आनंद वर्धन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसने राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान को जीईपी का फार्मूला बनाने का जिम्मा सौंपा।