बरसात के इस मौसम में विभाग के अधिकतर निर्माण कार्य और डामरीकरण का कार्य पूरी तरह से बंद है। हमारा पूरा फोकस सड़कों को खोलने पर है। हम प्रतिदिन 100 से 150 सड़कें खोल रहे हैं। राज्य में इस समय कुल 84 भूस्खलन वाले डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं। भूस्खलन वाले चिह्नित क्षेत्रों में दो से चार जेसीबी लगाई गई हैं। इस समय करीब 430 जेसीबी मशीनों को सड़कों को खोलने के काम में लगाया गया है। जहां तक ऑल वेदर रोड के रखरखाव का काम है, वह केंद्रीय कार्यदायी एजेंसियों के द्वारा ही किया जा रहा है।
-हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता, लोनिवि
पूरे विश्व में हिमालय ही सिर्फ पहाड़ नहीं है। यूरोप और विश्व के तमाम देशों में पहाड़ों में सड़कें बनाई जाती हैं और विकास के लिए निर्माण कार्य किए जाते हैं। लेकिन वहां निर्माण अवधि से अधिक समय शोध को दिया जाता है। पर्यावरण के साथ पारिस्थितिकी का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। जबकि हमारे यहां निर्माण पर अधिक ध्यान दिया जाता है। यहीं से समस्या का जन्म होता है। ऑलवेदर रोड के निर्माण में भी यही हुआ है। भविष्य की समस्याओं पर ध्यान न देकर निर्माण की गति पर ध्यान ज्यादा दिया जा रहा है। जिससे भूस्खलन और तमाम दूसरी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
- पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पर्यावरणविद एवं हेस्को प्रमुख
जब भी किसी ढलान का कटान होता है तो कटान के आसपास के क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो जाती है। प्राकृतिक कारणों में चट्टानों के संधि भ्रंश उजागर होते हैं। समय-समय पर आने वाले भूकंपों के कारण चट्टानें हिल जाती हैं। भीतर से कमजोर पड़ जाती हैं। साथ ही इन चट्टानों के बीच जल के दबाव में अंतर आ जाता है। जब चट्टानों को विस्फोटों से तोड़ा जाता है तो इनकी संधियां और ब्रांच रन भ्रंश (फाल्ट) जैसी दरारें खुल जाती हैं। इनमें वर्षा जल प्रवेश कर जाता है। इसके बाद चट्टानों की प्रकृति स्थाई नहीं रह पाती और इनमें घर्षण शुरू हो जाता है। पानी के कारण उनका वजन भी बढ़ जाता है, जिससे चट्टानों का ढलान की ओर खिसकना शुरू हो जाता है। ऑल वेदर रोड के मामले में भी बहुत से स्थानों पर ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
- डॉ. एके बियानी, भूगर्भशास्त्री, डीबीएस पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य
हिमालय सबसे नया पर्वत होने के साथ ही सबसे कमजोर भी है। इस इलाके में निर्माण को लेकर काफी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। यहां भूस्खलन के ज्यादातर हादसे सड़कों के साथ ही होते हैं। सड़क का वर्टिकल कर्व भी लैंडस्लाइड को न्योता देता है। इसलिए सड़कों के निर्माण के समय चट्टानों का कटान एक निश्चत ढलान के साथ होना चाहिए। ऐसे में भूस्खलन का खतरा कम रहता है।
- डॉ. केपी जुयाल, भूगर्भशास्त्री, वाडिया भू-विज्ञान संस्थान से सेवानिवृत्त