वर्ष 2001 से अब तक अलग-अलग कारणों से प्रदेश में 1467 गुलदार की मौत हुई है। इनमें से 72 गुलदार को मनुष्यों पर हमला करने के बाद आदमखोर घोषित कर मारा गया। इस वर्ष चालू माह तक ऐसे सात गुलदारों को मौत के घाट उतारा गया। वर्ष 2021 में अब तक कुल 63 गुलदार की मौत हुई है। इनमें दो गुलदार अज्ञात दुर्घटना में, चार सड़क दुर्घटना में, 14 आपसी संघर्ष में, 17 की स्वभाविक मौत हुई, जबकि 19 गुलदार अज्ञात मौत मरे।
वन विभाग की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उनका बहुत ज्यादा प्रतिफल सामने नहीं आ रहा है। खासकर गुलदार हमलों लगातार तेजी आई है।
वन मुख्यालय के अफसरों का कहना है कि गुलदारों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इनकी अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाने के साथ कुछ गुलदार को डीओ कॉलर भी लगाए गए हैं। देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक भी मानव-गुलदार के इस संघर्ष को कम करने के उपायों पर काम कर रहे हैं।
हमने गुलदारों पर पूर्व में किए गए शोध के आंकड़ों को विशेषज्ञों के साथ साझा किया है। हमें उम्मीद है कि उनके व्यवहार की बेहतर समझ हमें संघर्ष कम करने के तरीकों में मदद कर सकती है। गुलदार जब भी मानव आबादी में प्रवेश करता है, कुत्ते उसका पहला शिकार होते हैं। खासकर मानसून के सीजन में कुत्ते बारिश और बिजली चमकने के कारण दुबक जाते हैं, ऐसे में गुलदार शिकार न मिलने पर मानवों पर हमला कर देता है। अधिकतर ममालों बच्चे र महिलाएं उसके शिकार बनते हैं।
- जेएस सुहाग, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, उत्तराखंड