बता दें कि त्रिशूल पर्वत पर आरोहण के लिए नौसेना का दल 23 सितंबर को सुतोल गांव से आगे निकला था। विगत शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे दल के कुछ सदस्य हिमस्खलन की चपेट में आने से लापता हो गए थे। तभी से लापता सदस्यों की तलाश के लिए अभियान चल रहा था।
इसी क्रम में शनिवार सुबह जोशीमठ के सैन्य हेलीपैड से थल सेना और वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने त्रिशूल पर्वत के लिए उड़ान भरी। वहीं पैदल मार्ग से भी सेना और एसडीआरएफ के जवान घटनास्थल की ओर रवाना हुए। निम और गुलमर्ग से बुलाई गई टीम भी तलाश अभियान में जुटी रही।
पिथौरागढ़: चीन सीमा पर गश्त के लिए गए आईटीबीपी के जवान कुटी घाटी में फंसे
चीन सीमा पर गश्त करने गए भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 16 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम पहाड़ू में लगभग 24 घंटे फंसे रहे। भारतीय सेना की पंचशूल ब्रिगेड के जवानों ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित निकाल लिया है। सूत्रों के अनुसार आईटीबीपी के जवान शुक्रवार को कुटी घाटी में गश्त पर गए थे।
इसी दौरान वहां बर्फबारी शुरू हो गई और 16 जवानों का यह दल वहां से निकल नहीं सका। शनिवार को सभी जवान बीओपी में सुरक्षित लौट आए। व्यास घाटी में चीन सीमा से लगा क्षेत्र बेहद दुर्गम है। कुटी व्यास घाटी का अंतिम गांव है। लगभग 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में आठ माह तक बर्फ रहती है। शीतकाल में 12 फुट तक हिमपात होता है।