प्रवासियों को रोके रखने के लिए प्रदेश सरकार अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इतना होने पर भी स्कूली शिक्षा की कमी इस राह में रोड़े अटका सकती है। पलायन आयोग के अध्यक्ष एसएस नेगी भी स्वीकार कर रहे हैं कि प्रवासियों को रोके रखने में सबसे बड़ी बाधा पब्लिक स्कूलों की कमी का होना है। कई प्रवासी साफ कह रहे हैं कि स्थिति के सामान्य होते ही बच्चों के स्कूलों के कारण उन्हें वापस लौटना होगा।
राज्य स्तर पर समन्वय के लिए प्रकोष्ठ बनाया जाए। उद्यान, कृषि, फूड प्रोसेसिंग आदि पर जोर दिया जाए। प्रवासियों से हमें इको टूरिज्म, होम स्टे, सेवा क्षेत्र में मिल सकता है।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
अधिकतर प्रवासी सेवा क्षेत्र से जुड़े हैं और स्वरोजगार के लिए इच्छुक हैं। अभी इन सबकी हर संभव मदद करनी होगी। ऐसा न हो कि सरकार लोन जारी करे और स्वरोजगार करने वाला चक्कर ही काटता रहे।
-एसएस नेगी, अध्यक्ष पलायन आयोग