जबकि यहां एकल विद्यालय बगैर शिक्षकों के वैसे ही आनंदालय बने हैं, लेकिन इस सबके बावजूद स्कूल एजूकेशन क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट अधिकारियों की फौज वाले शिक्षा विभाग को आइना दिखा रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड और कर्नाटक दो ऐसे राज्य हैं, जिनकी रफ्तार बढ़ने के बजाए घटी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन एक भी ऐसा कार्यक्रम नहीं है, जो यह बता सके कि इस कार्यक्रम से शिक्षा की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है।
शिक्षा विभाग में शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसकी मॉनिटरिंग ठीक से नहीं हो रही। स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों के प्रशिक्षण के बाद लिखित परीक्षा होनी चाहिए। छोटी कक्षाओं में भी विषय विशेषज्ञ हों और इन सबसे जरूरी बात यह है कि जब तक शिक्षकों और अधिकारियों में मेरे बच्चे की भावना नहीं आएगी सुधार संभव नहीं है।
-पुष्पा मानस, पूर्व शिक्षा निदेशक
सूची में केरल पहले स्थान पर
नीति आयोग की ओर से जारी स्कूल एजूकेशन क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में केरल पहले, तमिलनाड़ु दूसरे और हरियाणा तीसरे नंबर पर है। जबकि अपना पड़ोसी राज्य हिमाचल छठे और उत्तरप्रदेश 17वें स्थान पर है।