राइट ऑफ वे पालिसी के तहत यूपीसीएल ने प्रति खंभे का सालाना किराया 500 रुपये तय किया है। प्रदेश में बीएसएन, उत्तरांचल केबल नेटवर्क (यूसीएएन) और बीएसएन प्रमुख केबिल संचालक हैं। इनके अलावा कस्बों और शहरों में अलग-अलग केबिल संचालक काम कर रहे हैं। अभी वे बिजली के खंभों पर केबिल इस्तेमाल करने का कोई पैसा नहीं दे रहे हैं। लेकिन अब उन्हें जेब ढीली करनी पड़ सकती है।
उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा बोझ
डायरेक्ट टू होम (डीटूएच) सुविधा के अलावा केबिल नेटवर्क का भी एक बड़ा बाजार है। इस बाजार से लाखों उपभोक्ता जुड़े हैं। केबिल संचालक उपभोक्ताओं को जितने चैनलों के प्रसारण की सुविधा देते हैं, उस हिसाब से वो डीटूएच से सस्ता पड़ता है। लेकिन जो संचालक किराया देंगे, तो इस बात की ज्यादा संभावना है कि इस अतिरिक्त खर्च का बोझ वो उपभोक्ताओं पर डालेंगे।