फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी हैं हम: 70 साल से इंजीनियरिंग का विश्व प्रसिद्ध संस्थान कर रहा हिंदी का उत्थान

Wed, 18 Aug 2021 10:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की

सार

हिंदी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. मनोज त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान में साहित्य एवं प्रौद्योगिकी दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी भाषा के प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विज्ञापन
आईआईटी रुड़की - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कहने को तो आईआईटी रुड़की विश्व प्रसिद्ध इंजीनियरिंग संस्थान है। लेकिन यहां भी हिंदी का परचम लहराने वाले कम नहीं हैं। वर्ष 1980 से प्रतिवर्ष न केवल हिंदी दिवस पर भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है बल्कि इसके प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से 1950 के दशक से ही अनेक बार वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों पर हिंदी में राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन भी किए जा रहे हैं। संस्थान की छमाही पत्रिका मंथन में हिंदी में प्रकाशित वैज्ञानिक शोध राजभाषा के वाहक बने हैं।

विज्ञापन


रुड़की विश्वविद्यालय के 21 सितंबर 2001 को आईआईटी के रूप में स्थापित होने के बाद तत्कालीन निदेशक प्रोफेसर प्रेमव्रत के प्रयासों से 31 जनवरी 2002 को हिंदी प्रकोष्ठ की स्थापना हुई। इसके जरिये वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विषयों पर हिंदी में शोध पत्र लिखकर वैज्ञानिक साहित्य तैयार किया जा रहा है। साथ ही कंप्यूटर पर हिंदी में कार्य को सरल बनाकर हिंदी में वैज्ञानिक रिपोर्टों का प्रकाशन किया जा रहा है। इसके अलावा हर तिमाही में कर्मचारियों और छात्रों के लिए हिंदी वेबिनार एवं हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। निदेशक की अध्यक्षता में होने वाली तिमाही बैठक में हिंदी को लेकर हुई प्रगति की जानकारी लेने के साथ सुझाव भी लिए जाते हैं।

छात्रों में हिंदी के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विभिन्न प्रतियोगिताएं जैसे निबंध लेखन, कविता लेखन, ट्रांसक्रिएशन, पोस्टर एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन कर विजेताओं को पुरस्कृत किया जाता है। प्रशासनिक क्षेत्र में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हिंदी कौशल को बढ़ाने के लिए संस्थान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी निबंध लेखन, हिंदी अनुवाद एवं हिंदी नोटिंग-ड्राफ्टिंग जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। हिंदी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. मनोज त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान में साहित्य एवं प्रौद्योगिकी दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी भाषा के प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों पर केंद्रित शब्दावलियों के सृजन-संकलन से लेकर कई शोधपत्र हिंदी में प्रकाशित किए जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह हिंदी को दशकों से आगे बढ़ा रहा संस्थान

‘वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग’ विषय पर वर्ष 1965 में रुड़की विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चार शोध पत्र हिंदी में प्रस्तुत किए गए। दो वर्ष बाद आयोजित गोष्ठी में हिंदी के छह शोध पत्र पढ़े गए। इसके कुछ ही समय बाद रुड़की विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में विशाल प्रदर्शनी ‘हिंदी का बढ़ता हुआ प्रयोग’ शीर्षक से लगाई गई, जो पांच दिनों तक चली और इसे कई हजार लोगों ने देखा। इसके बाद फिर से हिंदी पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में 12 शोध पत्रों को हिंदी में पढ़ा गया। इसकी विभिन्न मंचों पर सराहना हुई।  वर्ष 1978 में रुड़की विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय हिंदी संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें देश के सभी भागों से आए विद्वानों ने 44 शोध पत्र हिंदी में पढ़े। इस संगोष्ठी में 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।

हिंदी भाषियों को मिलता है प्रोत्साहन
संस्थान के हिंदीतर भाषी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान की ओर से संचालित प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पत्राचार पाठ्यक्रम एवं हिंदी कक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा हिंदी जानने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी टंकण पत्राचार पाठ्यक्रम की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। जो प्रतिभागी उत्तीर्ण होते हैं, उन्हें केंद्र सरकार के नियमानुसार नकद पुरस्कार और एक वर्ष के लिए वेतन वृद्धि दी जाती है।

वेब और फेसबुक पेज से भी किया जा रहा हिंदी का प्रसार
एक वर्ष पूर्व हिंदी प्रकोष्ठ के वेब और फेसबुक पेज का निर्माण किया गया है। इनके माध्यम से आईआईटी रुड़की की ओर से विभिन्न हिंदी गतिविधियों को प्रसारित किया जाता है। हिंदी भाषा की उन्नति के संदर्भ में देश के अन्य संस्थानों का समय-समय पर मार्गदर्शन भी किया जाता है।

सम्मान और पुरस्कार से कर रहे प्रोत्साहित
विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और नकद धनराशि से पुरस्कृत किया जाता है ताकि उनमें हिंदी में कार्य के प्रति रुझान बढ़ सके। संस्थान में हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिक को प्रतिवर्ष दस हजार रुपये नकद का प्रो. आशा कपूर राजभाषा उत्कृष्टता पुरस्कार भी दिया जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें