‘वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग’ विषय पर वर्ष 1965 में रुड़की विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चार शोध पत्र हिंदी में प्रस्तुत किए गए। दो वर्ष बाद आयोजित गोष्ठी में हिंदी के छह शोध पत्र पढ़े गए। इसके कुछ ही समय बाद रुड़की विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में विशाल प्रदर्शनी ‘हिंदी का बढ़ता हुआ प्रयोग’ शीर्षक से लगाई गई, जो पांच दिनों तक चली और इसे कई हजार लोगों ने देखा। इसके बाद फिर से हिंदी पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में 12 शोध पत्रों को हिंदी में पढ़ा गया। इसकी विभिन्न मंचों पर सराहना हुई। वर्ष 1978 में रुड़की विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय हिंदी संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें देश के सभी भागों से आए विद्वानों ने 44 शोध पत्र हिंदी में पढ़े। इस संगोष्ठी में 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
हिंदी भाषियों को मिलता है प्रोत्साहन
संस्थान के हिंदीतर भाषी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान की ओर से संचालित प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पत्राचार पाठ्यक्रम एवं हिंदी कक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा हिंदी जानने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी टंकण पत्राचार पाठ्यक्रम की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। जो प्रतिभागी उत्तीर्ण होते हैं, उन्हें केंद्र सरकार के नियमानुसार नकद पुरस्कार और एक वर्ष के लिए वेतन वृद्धि दी जाती है।
वेब और फेसबुक पेज से भी किया जा रहा हिंदी का प्रसार
एक वर्ष पूर्व हिंदी प्रकोष्ठ के वेब और फेसबुक पेज का निर्माण किया गया है। इनके माध्यम से आईआईटी रुड़की की ओर से विभिन्न हिंदी गतिविधियों को प्रसारित किया जाता है। हिंदी भाषा की उन्नति के संदर्भ में देश के अन्य संस्थानों का समय-समय पर मार्गदर्शन भी किया जाता है।
सम्मान और पुरस्कार से कर रहे प्रोत्साहित
विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और नकद धनराशि से पुरस्कृत किया जाता है ताकि उनमें हिंदी में कार्य के प्रति रुझान बढ़ सके। संस्थान में हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिक को प्रतिवर्ष दस हजार रुपये नकद का प्रो. आशा कपूर राजभाषा उत्कृष्टता पुरस्कार भी दिया जाता है।