ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय में पद सृजित किए बिना 30 तकनीकी, प्रशासनिक, अकादमिक एवं परामर्शदाताओं की भर्ती की गई, जिनके वेतन पर हर महीने 44 लाख खर्च आ रहा है। जबकि इन नियुक्तियों को लेकर कोई शासनादेश नहीं था। नियुक्तियां बिना पद और शासनादेश के अनियमित रूप से की गई हैं।
आउटसोर्स भर्ती का भी यही हाल
विश्वविद्यालय में वर्ष 2017-18 व 2018-19 में बिना पद-सृजन के आउटसोर्सिंग के माध्यम से 18 लिपिक, एक योग प्रशिक्षक एवं नौ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों कुल 26 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों के लिए किसी भी तरह की स्वीकृति नहीं थी।
मौखिक आदेश पर कर दीं नियुक्तियां
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सभी नियुक्तियां उच्च स्तर से मौखिक आदेश पर हुई हैं। इनमें रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सलाहकार के पुत्र की भी नियुक्ति भी शामिल है। जबकि विभागीय मंत्री के स्टाफ के भी कुछ लोगों एवं उनके रिश्तेदारों को नियुक्तियां दी गई हैं।
पद और शासन के आदेश के बिना विश्वविद्यालय में नियुक्तियों का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। विश्वविद्यालय ने आउटसोर्स से कुछ लोगों को अपने खर्च पर रखा, लेकिन ऑडिट से इसका कोई मतलब नहीं है। नियुक्तियों के मामले में मेरे पास शासन से कोई पत्र नहीं आया।
-ओम प्रकाश सिंह नेगी, कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय
बिना पद और शासनादेश के कर्मचारियों की तैनाती के मसले को दिखवाया जाएगा, ऑडिट रिपोर्ट में तो बहुत सारी चीजें आती हैं।
-डा.धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री