मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों को नजूल नीति को तैयार करते समय सभी विधिक और कानूनी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने को कहा है। सरकार की मंशा है कि नीति इतनी प्रभावी हो कि उसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके।
बता दें कि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के अलावा नैनीताल जिले के तराई क्षेत्र में सबसे अधिक नजूल भूमि है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 392,204 हेक्टेयर नजूल भूमि है। इस भूमि के बहुत बड़े हिस्से पर डेढ़ लाख से अधिक लोग काबिज हैं।
कहीं भूमि लीज पर है तो कहीं इस पर दशकों से कब्जे हैं। सरकार नीति के तहत इस भूमि को फ्री होल्ड कराना चाहती है। वहीं पूर्व में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी नजूल नीति लाने को लेकर मुख्यमंत्री से सिफारिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जिस तरह दिल्ली में कब्जेदारों को राहत दी गई, उसी तरह नजूल भूमि को फ्री होल्ड किया जा सकता है।
- 2009 में सरकार ने नजूल भूमि फ्री होल्ड नीति बनाई
- इसके तहत भूमि फ्री होल्ड करने की कवायद शुरू की
- सरकार की नीति के प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई
- हाईकोर्ट ने नीति पर रोक लगाई और कब्जे हटाने के आदेश दिए
- मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें यथास्थिति बनाने के आदेश हुए
- 2018 में भाजपा सरकार ने भी नई नजूल नीति लाने की कोशिश की