सत्ता के द्वार खोलने के मिथक वाली गंगोत्री सीट का मिथक सात दशक बाद इस विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहा है। गंगोत्री सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश चौहान ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने जा रही है।
विज्ञापन
यहां आम आदमी पार्टी प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल(सेनि) के चुनाव लड़ने से त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा था। लेकिन आप को अपेक्षानुरूप परिणाम नहीं मिल पाये। वहीं भाजपा के सुरेश चौहान निकट प्रतिद्वंदी पूर्व में दो बार विधायक रह चुके कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष व पार्टी प्रत्याशी विजयपाल सजवाण को हराने में सफल रहे।
चुनाव परिणाम के साथ मिथक को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर
अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय वर्ष 1952 करीब सात दशकों से गंगोत्री सीट पर जिस पार्टी का विधायक जीता सूबे में उसकी सरकार बनने का मिथक चला आ रहा है। इस चुनाव में भी इस मिथक के चलते सभी की निगाहें इस सीट के परिणाम पर बनीं हुई थी।
वहीं प्रदेश में एक बार भाजपा-एक बार कांग्रेस के सत्ता में काबिज होने का इतिहास चला आ रहा था। लेकिन इस बार प्रदेश में जनादेश भी पहले से सत्ता पर काबिज भाजपा के पक्ष में आया। जिससे गंगोत्री सीट का मिथक कायम है और चुनाव परिणाम के साथ मिथक को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर हैं।
गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष रावल हरीश सेमवाल का कहना है कि मां गंगा यहां की प्रधान देवी है। गंगा और यमुना इस प्रदेश व देश की धमनियों की तरह हैं। विशेषकर मां गंगा के आशीर्वाद से सीट पर जीतने वाले प्रत्याशी को सत्ता में रहने का सुख मिलता है। इसलिए यह मिथक आगे भी कायम रहेगा।