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Uttarakhand Election 2022: हर वक्त कम निधि की चर्चा... लेकिन जो मिला वह भी नहीं खर्चा, खास रिपोर्ट

Mon, 20 Dec 2021 11:40 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून

सार

सही और समयबद्ध योजनाओं के अभाव में विधायक निधि का बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं आता। यह बची रह जाती है। जाहिर है कि इससे विकास प्रभावित होता है।
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रुपये - फोटो : pixabay
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विस्तार
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विधायक निधि सभी विधायकों को अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए मिलती है। बहुधा विधायक निधि कम होने अथवा विकास के लिए बजट न होने की बात करते हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

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उत्तराखंड में 293 करोड़ की विधायक निधि खर्च ही नहीं हो पाई
दरअसल, सही और समयबद्ध योजनाओं के अभाव में विधायक निधि का बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं आता। यह बची रह जाती है। जाहिर है कि इससे विकास प्रभावित होता है। आलम यह है कि विधानसभा चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है और चुनावी आचार संहिता लगने वाली है। इसके बाद भी सितंबर 2021 तक उत्तराखंड में 293 करोड़ की विधायक निधि खर्च ही नहीं हो पाई थी। 

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इस बार कोरानाकाल में विधायकों को स्वास्थ्य उपकरण खरीदने के लिए विधायक निधि से एक करोड़ रुपये तक जारी करने की अनुमति दी गई। बावजूद इसके हर बार देखने में आता है कि कुछ विधायकों ने इसे चुनावी साल में माहौल बनाने का माध्यम बना दिया है। ऐसे विधायक चौथे और (पांचवें वर्ष में खर्च की रफ्तार बढ़ाते हैं। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर तो सवाल उठते ही हैं, साथ ही भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है।

विधायक निधि से होने वाले कामों में चहेतों को ठेके देने, कमीशनखोरी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। जो विधायकों को कठघरे में खड़ा करते हैं। आर्थिक तौर पर सीमित संसाधनों वाला राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड में तीन करोड़ 75 लाख रुपये की विधायक निधि खर्च के लिए दी जाती है। विकास कार्यों के लिए पक्ष-विपक्ष के लोग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते हैं, लेकिन जो निधि उनके पास है, उसका सही समय पर इस्तेमाल नहीं करते। यदि प्रत्येक विधायक पहले साल से जोर लगाए तो इस राशि से बहुत से विकास कार्य गुणवत्ता के साथ समय से पूरे किए जा सकते हैं। 

यूपी-हिमाचल से ज्यादा राशि मिलती है उत्तराखंड में विधायक को 
उत्तराखंड में विधायक निधि - तीन करोड़ 75 लाख रुपये
उत्तर प्रदेश में विधायक निधि - तीन करोड़ रुपये 
दिल्ली में विधायक निधि - चार करोड़+छह करोड़ रुपये 
हिमाचल में विधायक निधि - एक करोड़ 75 लाख रुपये

23 प्रतिशत विधायक निधि नहीं हो पाई खर्च 
उत्तराखंड में विधायकों को 2017 से सितंबर 2021 तक कुल 1256.50  करोड़ रुपयेे की विधायक निधि उपलब्ध हुई, इसमें सितंबर 2021 तक  केवल 77 प्रतिशत यानि 963.40 करोड़ रुपये की विधायक निधि ही खर्च होे पाई  है। 23 प्रतिशत यानि 293.10 करोेड़ की विधायक निधि खर्च होेनेे को शेष  हैै। विगत दिनों विधानसभा सत्र के दौरान सदन में विपक्ष ने विधायक निधि से खरीदे जाने वाले चिकित्सा उपकरणों का मामला उठाया। आरोप था कि कोरानाकाल की दूसरी लहर में उन्होंने चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए विधायक निधि से पैसा जारी किया था, लेकिन वह उपकरण आज तक नहीं खरीद जा सके। 

एंबुलेंस खरीदी, अब बिना ड्राइवर खड़ी हैं...
विधानसभा सदन में विधायक काजी निजामुद्दीन ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा था। उनके अनुसार, राज्यभर में कई विधायकों ने विधायक निधि से कोरोनाकाल में एंबुलेंस की खरीद कराई। लेकिन ड्राइवर और पेट्रोल की व्यवस्था न होने के कारण वह एंबुुलेंस आज तक खड़ी हैं। आमतौर पर विधायक निधि से कोई भी विधायक लीक से हटकर काम नहीं करते हैं। लेकिन इस बार विधायक मनोज रावत अपने विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से 168 गांवों में लाइब्रेरी बनवा रहे हैं। 

 विधायक निधि खर्च की एक अलग से कार्ययोजना बननी चाहिए। विधायक को पहले साल से ही विकास के लिए निधि खर्च करने पर जोर लगाना चाहिए। इस निधि से खर्च होने वाले विकास कार्यों को करने और कराने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 
- मुकेश पंत, सामाजिक कार्यकर्ता 

यह बात सही है कुछ विधायक इसे चुनावी वर्ष अपने पक्ष में माहौल बनाने में खर्च करते हैं। कई बार विधायक निधि खर्च करना चाहते हैं तो अधिकारी उनको गुमराह करने की कोशिश भी करते हैं। विधायकों को अडिग रहना चाहिए।  जनता का पैसा, जनता के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ खर्च होना चाहिए। 
- मातबर सिंह कंडारी, पांच बार विधायक रहे

विधायक निधि से आमतौर पर छोटे-मोटे विकास कार्य ही किए जाते हैं। इसका इस्तेमाल जनहित में किया जाता है। कोशिश होनी चाहिए कि इस निधि से जो भी विकास कार्य हों, वह दीर्घकालीन हों, ताकि लंबे समय तक लोगों को उनका लाभ मिल सके। पहले ही अपेक्षा अब विधायक निधि की राशि बढ़ भी गई है, विधायक चाहें तो इस निधि से क्षेत्र में बेहतर विकास कार्य करवाकर जनता के बीच अच्छी पैठ बना सकते हैं। 
- शूरवीर सिंह सजवाण, तीन बार विधायक रहे

विधायक निधि में इतने झोल हैं कि विधायक चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता है। विधायक निधि बंद हो जानी चाहिए। यदि आप सही काम करना चाहते हैं, तो अधिकारी कई तरह के अड़ंगे लगा देते हैं। कोरोनाकाल में तमाम उपकरणों की खरीद के लिए विधायक निधि से पैसा दिया, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर समाप्त हो जाने के बाद भी उपकरण आज तक नहीं खरीदे जा सके। वजह, उन्होंने चिह्नित उपकरण ही खरीदने का दबाव बनाया था। बाकायदा इनकी लिस्ट अधिकारियों को दी गई थी।  
- मनोज रावत (केदारनाथ से विधायक

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विधायक संजीव सबसे आगे, मनोज सबसे पीछे

उत्तराखंड के 71 विधायकों में से 12 विधायकों की 70 प्रतिशत से कम विधायक निधि खर्च हुई है। जबकि एक विधायक की केवल 50 प्रतिशत विधायक निधि ही खर्च  हुई है। जबकि 90 प्रतिशत विधायक निधि खर्च होने वाले विधायकों में केवल एक विधायक शामिल है। सबसे कम विधायक निधि 50 प्रतिशत खर्च वालों में  केदारनाथ विधायक मनोज रावत हैं। जबकि सर्वाधिक 90 प्रतिशत खर्च वाले  नैनीताल विधायक संजीव आर्य हैैं।

60 से 75 प्रतिशत निधि खर्च करने वाले विधायक 
सूचना के अनुसार 60 प्रतिशत विधायक  निधि खर्च वाले विधायक धन सिंह हैं। 61 से 65 प्रतिशत खर्च वालेे विधायकों  में महेश नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी, सहदेव पुंडीर का नाम शामिल है। 66  से 70 प्रतिशत राशि खर्च करने वालों में प्रीतम सिंह, मगन लाल शाह, मदन  सिंह कौशिक, मुन्ना सिंह चौहान, करन मेहरा, पुष्कर सिंह धामी, विनोद चमोली,  महेंद्र भट्ट के नाम शामिल हैैं। इसी तरह से 71 से 75 प्रतिशत खर्च वाले  विधायकोें में प्रेमचंद अग्रवाल, यशपाल आर्य, सुरेंद्र सिंह जीना, राजकुमार  ठुकराल, केदार सिंह रावत, खजान दास, हरबंश कपूर, गोविंद सिंह कुंजवाल,  त्रिवेंद्र सिंह रावत, सतपाल महाराज, राजकुमार, विजय सिंह पंवार, सुबोध  उनियाल शामिल हैं।

76 से 80 प्रतिशत निधि खर्च करने वाले विधायक 
इसी तरह से 76 से 80 प्रतिशत खर्च वाले विधायकों में राजेश शुक्ला, हरीश  धामी, हरभजन सिंह चीमा, हरक सिंह, उमेश शर्मा, दीवान सिंह बिष्ट, पूरन सिंह  फर्त्याल, भारत सिंह चौधरी, इंदिरा हृदयेश, अरविंद पांडे, आदेश सिंह  चौहान, रेखा आर्य, देशराज कर्णवाल, बलवंत सिंह, रितु खंडूरी,  सुरेश राठौर, चंद्र पंत, ममता राकेश, शक्तिलाल शाह, रघुराम चौहान, कैलाश  गहतोड़ी, चंदन राम दास शामिल हैं।

81 से 90 प्रतिशत निधि खर्च करने वाले विधायक 
81 से 85 प्रतिशत खर्च वाले विधायकों  मेें दिलीप सिंह रावत, गणेेश जोशी, स्वामी यतीश्वरानंद, बिशन सिंह चुफाल,  प्रेम सिंह राणा, मुकेश कोली, जीआईजी मैनन, मीना गंगोला, काजी निजामुद्दीन,  प्रीतम सिंह पंवार, संजय गुप्ता, विनोद कंडारी, सौैरभ बहुगुणा, प्रदीप  बत्रा शामिल हैैं। 86 से 90 प्रतिशत खर्च वाले विधायकों में कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, राम  सिंह केड़ा, फुरकान अहमद, आदेश चौैहान (रानीपुर), बंशीधर भगत, धन सिंह  नेेगी, नवीन चंद्र दुम्का, गोपाल सिंह रावत और संजीव आर्य शामिल है।

मंत्रियों की विधायक निधि खर्च विवरण
 नाम                           सीट                       खर्च प्रतिशत         अवशेष (लाख में)
 पुष्कर सिंह धामी             खटीमा                   69                         557
 बंशीधर भगत                 कालाढूंगी                87                      229
 यतीश्वरानन्द                   हरिद्वार ग्रामीण           81                      333
 विशन सिंह चुफाल           डीडीहाट                81                      331
 यशपाल आर्य                  बाजपुर                  71                      519
 सतपाल महाराज              चौबट्टाखाल             72                     495
 हरक सिंह रावत               कोटद्वार                 77                      415
धनसिंह रावत                  श्रीनगर                   60                      717
 गणेश जोशी                    मसूरी                    81                      346
 सुबोध उनियाल                नरेंद्र नगर                75                      443
 रेखा आर्य                     सोमेश्वर                    78                      391
 अरविंद पांडे                    बाजपुर                  78                      394

 जिलों में सबसे कम व ज्यादा अवशेष वाले विधायक धनराशि (लाख में)
 जिला  -                        सबसे कम        -                            सबसे ज्यादा
 उत्तरकाशी                       गोपाल सिंह    (166.61)           केदारसिंह रावत  (507.51)
 टिहरी                            धनसिंह नेगी    (224.39)          विजयसिंह पवार  (459.54)
 देहरादून                         जीआईजी मैनन    (311.46)       प्रीतम सिंह      (600.56)
 हरिद्वार                           आदेश चौहान    (231.91)        मदन कौशिक  (571.33)
 पौड़ी                              मुकेश कोली    (327.72)        धनसिंह रावत  (717.23)
 रुद्रप्रयाग                          भरत सिंह    (403.06)            मनोज रावत  (878.80)
 चमोली                           महेंद्र भट्ट    (536.08)            सुरेन्द्र सिंह  (631.86)
 बागेश्वर                          चंदनराम दास    (352.87)        बलवंत सिंह  (376.90)
 अल्मोड़ा                         रघुनाथ चौहान    (356.73)       महेश नेगी  (660.04)
 नैैनीताल                         संजीव आर्या    (169.38)         दीवान सिंह बिष्ट  (405.96)
 ऊधमसिंह नगर                 सौरभ बहुगुणा    (273.22)           पुष्कर सिंह धामी (556.76)
 चंपावत                        कैलाश गहतोड़ी    (353.96)         पूरन सिंह  (404.53)
 पिथौरागढ़                      बिशन सिंह    (331.31)              हरीश    सिंह धामी (426.92)
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