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उत्तराखंड में 'का बा': किसी ने कहा पलायन से पहाड़ बेहाल बा, कोई बोला डबल इंजन से राज्य मालामाल बा

Sat, 05 Feb 2022 04:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड का आम नागरिक सियासी तौर पर न सिर्फ प्रबुद्ध है बल्कि वह संवेदनशील भी है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी लेखनी सरकार और सिस्टम के पक्ष में उठाई है। पक्ष और प्रतिपक्ष की विविधतापूर्ण आवाजें ही लोकतंत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)
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विस्तार
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उत्तराखंड में का बा के विमर्श में हमें ढेर सारी रचनाएं प्राप्त हो रही हैं। प्रबुद्ध पाठकों ने अपने अनमोल विचारों को लेखनीबद्ध किया है। ज्यादातर रचनाओं में राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को शिद्दत से उठाते हुए उनके समाधान की बात करने की बात कही गई है।

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एक बात तो तय है कि उत्तराखंड का आम नागरिक सियासी तौर पर न सिर्फ प्रबुद्ध है बल्कि वह संवेदनशील भी है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी लेखनी सरकार और सिस्टम के पक्ष में उठाई है। पक्ष और प्रतिपक्ष की विविधतापूर्ण आवाजें ही लोकतंत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। ऐसी ही कुछ चुनिंदा रचनाएं हमने चयनित की हैं- 
 

ये भी पढ़ें...Election 2022: लोक गायिका नेहा राठौर के 'यूपी में का बा' ने उत्तराखंड में भी दिया विमर्श को जन्म

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बागेश्वर खुनौली के कमल कवि काण्डपाल की रचना
 पलायन से पहाड़ बेहाल बा
बीमारन कैं डोली क सहार बा
राज्य पर कर्ज की मार बा
पांच साल में तीन मुख्यमंत्री
सबको पेंशन घर कार बा
नेताओं की भरमार बा
विधायक जी बुढ़या जावै 
बेटा बहू तैयार बा

उत्तराखंड में कमाल बा
डबल इंजन सरकार बा 
संसाधन मालामाल बा
सीएम युवा बाकमाल बा
सुरेंद्र रावत, देहरादून

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नेतन की धुलाई बा!
टिकटन की रार बा,
सौतन द्वार पहुँचाई बा!!
सत्ता की मलाई बा,
नैतिकता तार-तार  बा!
- नय्यर हसीन, हल्द्वानी

पांच साल अपने घर के दरवाजे बंदकर
आज हमारे घर के  दरवाजे खटखटाते हैं
5 साल जनता को रुलाते
बस अपने चमचों के घर को चमकाते  है
हमारे पैसे से ही  चुनाव में
सीधी उल्टी गंगा बहाते हैं....
- योगाचार्य हरीश चन्द्र ओझा, ऊधम सिंह नगर

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झूठ छुपा सच का लबादा ओढ़ लेते हैं।
नकली मुस्कान नकली हंसी हंस अपना रौद्र रूप छुपा लेते हैं।
- दिनेश जोशी, देहरादून
 
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पेट की भूख,सदा से रही सता।
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सुनिए , नेता जी यही है काम तुम्हारा
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पहाड़   खोकल
गौं  खाली ह्वेगिन
अर बांजी छन सारी
पिछला बीस सालू मा बस
पांच साल तु खा
पांच साल मि खौंलू
द्विया पार्टी  बारी बारी
 - देवेंद्र जोशी, 76  विद्या विहार देहरादून

चुनाव का मौसम आ गया है,
नेता बादल बन छा गए है,
झोली फैला, आशीष माँगने
आपके द्वार आ गए हैं।
कुछ नए तो कुछ वही चेहरे हैं,
घोषणाओं के साथ,नारों का बाजार गरम है
रोजगार, पलायन, महँगाई
ज्वलंत मुद्दे हैं।
अभिनव पंत, लालकुँआ
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