सभी सीटों पर मतदाताओं की खामोशी ने प्रत्याशियों की उलझनें बढ़ा दी हैं। मतदाता खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। जिले में मुस्लिम, हिंदू ओबीसी और दलित वोटर बड़े फैक्टर हैं। जातीय वोटरों के ध्रुवीकरण होने से किसी भी प्रत्याशी को सत्ता तक पहुंचा सकते हैं। आम आदमी पार्टी भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ रही है।
14 फरवरी को मतदान
मतदाताओं की खामोशी और आम पार्टी की सेंधमारी से भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की नींद उड़ी है। हरिद्वार ग्रामीण और हरिद्वार शहर जिले ही नहीं प्रदेश की सबसे हॉट सीट हैं। 14 फरवरी को मतदान है। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए हर क्षेत्र में पहुंचने के लिए वक्त कम है। जो प्रत्याशी जिस क्षेत्र में कमजोर हैं वहां ताकत झोंक रहे हैं।
प्रत्याशी ने गैर राजनीतिक लोगों से क्षेत्रों में जासूसी करवा रहे हैं। जिन इलाकों में प्रत्याशी और पार्टी का जनाधार कमजोर हैं वहां अगले दिन जनसंपर्क किया जा रहा है। पूरे दिन के जनसंपर्क के बाद प्रत्याशियों के कार्यालयों में जासूसी के आधार पर रणनीति बन रही है। उसी के बाद उन इलाकों पर फोकस किया जा रहा है। उस क्षेत्र के मतदाताओं को साधने के लिए वहां के प्रभावशाली लोगों को विश्वास में लिया जा रहा है।