-अबकी बार-60 के पार ( भाजपा)
-लड़की हूं, लड़ सकती हूं (कांग्रेस)
-जब तक सूरज-चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा (कांग्रेस)
-कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ (कांग्रेस)
-कांग्रेस को लाना है, देश को बचाना है (कांग्रेस)
-ये तो केवल झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है (भाजपा)
-हर हर मोदी-घर-घर मोदी (भाजपा)
-आप का झाडू, आप का नारा (आप)
-इस बार चलेगी झाड़ू (आप)
अगर मेरी पसंद का कोई सुपरहिट गीत या नारा है, और उसके म्यूजिक पर प्रचार के लिए थीम
सांग बनाया गया है तो स्वाभाविक है कि वह मुझे भी पसंद आएगा। प्रचार के लिए हिंदी और गढ़वाली दोनों ही भाषाओं में गीत तैयार किए गए हैं। वाहनों पर रिकॉर्डेड ऑडियो भी दोनों भाषाओं में चल रहा है ताकि सभी वोटरों तक प्रत्याशी और पार्टी की बात आसानी से पहुंच जाए। वोटरों को प्रचार का यह तरीका पसंद भी आ रहा है।
संजीव वर्मा, चुनाव विशेषज्ञ
प्रचार में महसूस नहीं हो रही कपूर साहब की कमी
देहरादून। पिछले कई चुनावों में जीत हासिल कर प्रदेश की विधानसभा तक पहुंचने वाले हरबंस कपूर का चुनाव प्रबंधन भी बेहतरीन था। वह पूरे प्रचार की कमान खुद संभालते थे। उस वर्ष मैंने खुद ही प्रचार के लिए थीम सांग तैयार किया है। उन्होंने थीम सांग में कपूर साहब के वर्षों के कार्यकाल और भविष्य के विजन को शामिल किया है।
-अमित कपूर, भाजपा