इसमें से कुछ तो सीधे बागी होकर चुनाव में दम दिखा रहे हैं, लेकिन कुछ अंदर ही अंदर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ माहौल बनाते नजर आए। इस भीतरघात का डर भाजपा और कांग्रेस दोनों के दिग्गजों को सता रहा है। लिहाजा कोई भी दिग्गज अभी तक अपनी जीत से पूरी तरह से आश्वस्त नजर नहीं आ रहा है।
उत्तराखंड की 70 सीटों पर मतदान के बाद अब राजनीतिक दल हार-जीत की गणित लगाने में जुट गए हैं। बूथ स्तर पर वोटों की गिनती से हार-जीत का समीकरण बना रहे हैं। वह बात अलग है कि तस्वीर तो 10 मार्च को ही साफ होगी।
सोमवार को प्रदेश के मतदाताओं का जनादेश ईवीएम में बंद हो गया, लेकिन राजनीतिक दल और चुनाव रणी में उतरे प्रत्याशी मतदान के आधार पर हार-जीत का समीकरण बना रहे हैं।
सियासी दलों और उम्मीदवारों की यह गणित कितनी सटीक साबित होती है, यह तो चुनाव नतीजों से स्पष्ट हो पाएगा। इस बार कोरोना संक्रमण के बीच हुए चुनाव में सियासी दलों और उम्मीदवारों को प्रचार का ज्यादा वक्त नहीं मिला। मतदान के कुछ दिन पहले ही दलों ने दिग्गजों को उतारकर चुनाव प्रचार को धार दी थी। भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने चुनावी मैदान में मोर्चा संभाला था। साथ ही सभी दलों ने अपने घोषणा पत्र में लोक लुभावने वादे भी किए थे।