अनूप नौटियाल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बाहर से आकर लोगों के उत्तराखंड में बसने से इस राज्य के सांस्कृतिक स्वरूप पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही जिन शहरों में इतनी बड़ी संख्या में लोग बस रहे हैं उन पर भी दबाव बढ़ेगा। क्योंकि राज्य के ज्यादातर शहर पहले से ही क्षमता से ज्यादा बोझ झेल रहे हैं। इससे नागरिक सुविधाओं की कमी लगातार बढ़ रही है। जिन सीटों पर मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है, वे सभी मैदानी सीटें हैं।
देहरादून के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता बढ़े हैं। पिछले 10 वर्षों में इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। धर्मपुर के अलावा रुद्रपुर, डोईवाला, सहसपुर, कालाढूंगी, काशीपुर, रायपुर, किच्छा, भेल रानीपुर और ऋषिकेश की टॉप 10 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में सबसे ज्यादा, 41से 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह बात सामने आती है कि तीसरे विधानसभा चुनाव में राज्य में 6377,330 मतदाता थे। यह संख्या अब 8266644 है। राज्य में 2012 से 2022 के बीच मतदाताओं की संख्या में 1889314 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। चार मैदानी जिलों की 36 सीटों पर 10 वर्ष के दौरान 37 प्रतिशत मतदाता बढ़े। सबसे ज्यादा 43 प्रतिशत मतदाता ऊधमसिंह नगर जिले में बढ़े।
पर्वतीय जिलों की 34 सीटों पर 10 वर्षों में मतदाताओं की संख्या में 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई। सबसे कम 13 प्रतिशत मतदाता अल्मोड़ा जिले में बढ़े। 207718 मतदाताओं के साथ देहरादून की धर्मपुर विधानसभा प्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा है। वहीं, अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा क्षेत्र में 10 वर्षों के दौरान सबसे कम आठ प्रतिशत मतदाता बढ़े।