कार्मिक के निर्देशों के तहत चारों आरोपी इंजीनियरों को पक्ष रखने का मौका दिया गया। हालांकि, संतोषजनक जवाब न मिलने पर चारों की सेवाएं समाप्त की गईं। पेयजल निगम के एमडी रणवीर सिंह चौहान ने बताया, परीक्षण और सुनवाई का मौका देने के बाद सेवाएं समाप्त की गई हैं।
भर्ती करने वालों पर क्या होगी कार्रवाई
चार इंजीनियरों की सेवाएं तो समाप्त कर दी गईं, लेकिन अब सवाल ये उठ रहे कि इनकी गलत तरीके से भर्ती का जिम्मेदार कौन था। क्या भर्ती करने वालों की भी कभी कोई जांच हुई है। अगर नहीं तो क्या कोई उन पर भी कार्रवाई होगी। हालांकि, ये बताया जा रहा कि जिन अधिकारियों के समय में ये भर्ती हुई थी, उन्हें सेवानिवृत्त हुए चार वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, इसलिए कार्रवाई मुश्किल है।