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अब कमाई करेगा उत्तराखंड के CM का 'भूत बंगला'

Fri, 22 Aug 2014 03:48 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में अभिशप्त और पुराने अनुभवों में वास्तु का दोषी ठहराया जाने वाला मुख्यमंत्री का भूत बंगला अब कमाई करेगा।
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कैंट रोड स्थिति मुख्यमंत्री के सरकारी आवास को आबाद करने की तैयारी है। मंहगे होटलों में होने वाली सरकारी और गैर सरकारी बैठकें व कार्यक्रम अब इस बंगले में होंगे।

जिसके लिए संबंधित विभागों, एजेंसियों व संस्थाओं से निर्धारित रकम वसूली जाएगी। सरकार ने यह फैसला खाली पड़े बंगले के रखरखाव पर हर साल खर्च होने वाले लाखों रुपयों की भरपाई के लिए लिया है।
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रावत का बीजापुर गेस्ट हाउस में रहने का फैसला

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फिलहाल बीजापुर गेस्ट हाउस में ही रहने का फैसला लिया है। खर्च में कटौती और फिजूलखर्ची रोकने के उनके प्रयासों में उनका सरकारी बंगला आड़े न आए इसलिए इस्तेमाल का फैसला लिया गया है।

सरकार ने इसके इस्तेमाल के आदेश दे दिए हैं। गुरुवार को इसकी शुरूआत बैंकर्स समिति की बैठक से हुई। जिसमें मुख्यमंत्री बनने के 202 दिनों बाद हरीश रावत ने पहली बार सरकारी आवास में प्रवेश किया।

बताते हैं राज्य बैंकर्स समिति की ओर से कुछ राशि भी जमा कराई गई है।

वास्तुशास्त्री इस बंगले में बताते हैं दोष

सरकार चाहती है जो सरकारी बैठक व कार्यक्रम देहरादून के मंहगे होटल व अन्य जगहों पर होते हैं उन्हें यहां कराया जाए।

इससे परिसर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा साथ ही रखरखाव पर आने वाला खर्च भी निकलेगा। कभी पुराने सर्किट हाउस के रूप में पहचान रखने वाला यह परिसर अब प्रदेश के चुनिंदा खूबसूरत भवनों में पहचान रखता है। लेकिन इसके साथ जो राजनैतिक कहानियां जुड़ी उससे इसे भूत बंगला मान लिया गया।

पहाड़ की शैली में बने इस बंगले में वास्तुशास्त्री दोष बताते हैं। दरअसल मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के समय पुराने भवन को गिराकर यहां खूबसूरत मुख्यमंत्री आवास बनना शुरू हुआ।
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जो CM इस बंगले में गया सत्ता से हाथ धोया

खंडूड़ी इस खूबसूरत मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश नहीं कर सके। रमेश पोखरियाल निशंक मुख्यमंत्री बने तो गृह प्रवेश किया लेकिन सत्ता से बेदखल हो गए।

उसके बाद फिर खंडूड़ी मुख्यमंत्री बने लेकिन कुछ महीनों बाद हुए चुनाव बाद नहीं लौटे। कांग्रेस जीती विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बने और बंगले में प्रवेश किया।

विजय बहुगुणा जब तक मुख्यमंत्री रहने मुसीबतों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। बिना कार्यकाल पूरा किए बहुगुणा को इस बंगले से अपना सामान समेटना पड़ा।

मुख्यमंत्री हरीश रावत बार-बार सरकारी आवास में जाने के सवाल को टाल देते हैं। उनका तर्क है कि बीजापुर गेस्ट हाउस में वह अधिक से लोगों से मिल पाते हैं वहां ऐसा संभव नहीं हो सकेगा।
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