जांच रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधक ने प्रबंध समिति के सदस्यों से जो धनराशि जमा की। उसे स्कूल के खाते के स्थान पर चंदे खाते में जमा कर वित्तीय नियमों को ताक पर रखा। प्रबंधक ने उस धनराशि को अपने निजी कार्य में खर्च किया। जबकि स्कूल के पुराने खातों को बंद कर दिया गया। स्कूल के अभिलेखों को स्कूल प्रबंधक के साथ मिलकर खुर्द बुर्द किया गया।
यह भी मामला सामने आया कि एक विद्यालय में हिंदी शिक्षक के पद पर भर्ती में विशेषज्ञ की असहमति के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर तत्कालीन मुख्य शिक्षा अधिकारी ने भर्ती के लिए अनुमोदन कर दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस प्रकरण में विभाग ने पूर्व में मुख्य शिक्षा अधिकारी का जवाब तलब किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि एक अन्य प्रकरण में स्कूल में लिपिक के आरक्षित पद पर सामान्य व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। वहीं, एक अन्य मामले में ऐसे व्यक्ति जिस पर गबन के आरोप में मुकदमा चल रहा है। उसे अशासकीय स्कूल में प्रबंधक के पद पर नियुक्त के लिए अनुमोदन कर दिया गया।