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खतरे में है उत्तराखंड की चीन सीमा

Thu, 21 Nov 2013 03:25 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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चीन सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ाने के लिए नई स्ट्राइक कोर के लिए केंद्र ने मंगलवार को अप्रूवल दे दिया है, लेकिन विस्तारीकरण योजना की उत्तराखंड में राह आसान नहीं है।
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इन्फेंट्री यूनिटों की तैनाती
कोर की प्रस्तावित संरचना में उत्तराखंड में आर्म्ड और इन्फेंट्री यूनिटों की तैनाती के साथ प्रशिक्षण और फायरिंग रेंज बनाए जाने हैं। गंगोत्री इको सेंसटिव जोन बनने से सेना को भारी तोपखाने के अभ्यास के लिए कई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मिलना आसान नहीं है।

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साढ़े तीन सौ किलोमीटर में फैले चीन बार्डर को जोड़ने वाली अधिकांश आपदा की भेंट चढ़ी हैं, जबकि निर्माणाधीन बॉर्डर सड़क परियोजनाओं को निर्धारित छह वर्ष के लक्ष्य के भीतर पूरा कर पाना संभव नहीं दिख रहा है। राज्य सरकार के पास सेना ने अभी तक 23 हजार एकड़ से अधिक भूमि की जरूरत का प्रस्ताव दे चुकी है।
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अगर पंतनगर में ड्रोन बेस के लिए भूमि स्वीकृति होने के प्रस्ताव पर मिली सहमति को छोड़ दिया जाए तो शेष भूमि प्रकरणों पर अभी तक कार्यवाही शुरू नहीं हुई है।

वन एवं पर्यावरण की आपत्तियां
पर्वतीय क्षेत्र में मध्यम और हल्के दर्जे के तोपखाने के अभ्यास के लिए सेना ने नंदादेवी और गंगोत्री दो क्षेत्र चिन्हित किए थे, लेकिन नंदा देवी बायोस्फेयर के बाद गंगोत्री में अब इको सेंसटिव जोन बनने से भूमि मिलने पर सवाल खड़े हो गए  हैं। इसके अलावा भी भूमि हस्तांतरण के पांच प्रस्ताव सेना ने राज्य सरकार को दिए हैं।

सीमा तक पहुंच मुश्किल
बीआरओ को 2018 तक 40 सीमा सड़कों का निर्माण करने का लक्ष्य है। एक तो पहले ही बीआरओ लक्ष्य से पीछे चल रहा है ऊपर से उत्तरकाशी, जोशीमठ, नीती, मलारी, पिथोरागढ़ में आपदा से हुआ नुकसान संकट बढ़ा रहा है।
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