राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण समेत 12 विधेयक पेश, एक वापस
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को सरकारी सेवा में आरक्षण विधेयक समेत कुल 12 विधेयक पटल पर रखे गए, जबकि कारखाना (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक 2020 को पुनर्विचार के लिए वापस लिया गया। बुधवार को भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए राज्य के वित्त पर रिपोर्ट पटल पर पेश हुई। रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय एवं बजट प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं।
अनावश्यक साबित हुई 7072.07 करोड़ की अनुपूरक मांग
कैग ने सरकार की बजट प्रक्रिया की जांच में पाया कि 40 प्रकरणों में 7072.07 करोड़ की अनुपूरक मांग अनावश्यक साबित हुई। बजट में 51296.33 करोड़ का प्रावधान किया गया था और सरकार ने 44,832.36 करोड़ ही खर्च किए। इस तरह शेष राशि बेकार साबित हुई। कैग ने टिप्पणी की कि पुनर्वियोग की प्रक्रिया केवल चूकों और दूरदर्शिता की कमी को दूर करने के लिए नहीं बनाई गई है। इतना ही नहीं कैग ने यह भी पाया कि इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल बजट प्रावधान में से 14,318.05 करोड़ की राशि खर्च ही नहीं की जा सकी। मूल बजट 57,937.83 करोड़ रुपये का था। इसमें 7,074.57 करोड़ पूरक प्रावधान के साथ कुल बजट 65,012 करोड़ हो गया, लेकिन 50,694.35 करोड़ खर्च हो पाया।