कच्चे माल पर पड़ा महंगाई का असर
कारीगर नेमा राम ने बताया मूर्ति की कीमत में बढ़ोतरी का सीधा कारण कच्चे माल के बढ़ते दाम हैं। मूर्ति बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी), लकड़ी, नारियल का जूट, कपड़ा और रंग का प्रयोग किया जाता है। मूर्तियों के शृंगार के लिए ऑयल पेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऑयल पेंट की कीमत में प्रति डिब्बा 20 से 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं, रंगाई के लिए ब्रश भी 30 रुपये की जगह इस साल 45 रुपये में मिल रहे हैं। इसके चलते मूर्ति की कीमतों में सीधे 70 फीसदी इजाफा हुआ है।
रंग भरने और गहने बनाने में लगता है अधिक समय
मूर्तिकार अंबे ने बताया, एक मूर्ति को बनाने में करीब चार महीने का समय लगता है, लेकिन रंग भरने और मूर्ति के जेवर बनाने में सबसे ज्यादा समय लगता है। इसी काम के बाद ही मूर्ति आकर्षित बनती है। बताया, पूरे साल वह अन्य प्रकार की मूर्तियां, बर्तन, गमले आदि भी बनाते हैं।