स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल सख्ती के साथ उन्हें खबरदार किया। उनकी सख्ती का अंदाज यह रहा कि उनके आदेश पर सदन में बातचीत करने पर सत्ता पक्ष के विधायक संजय गुप्ता का फोन तक जब्त किया गया। मंत्रियों डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल और डॉ. धनसिंह सदन में होमवर्क दिखा, लेकिन बाकी मंत्रियों की उतनी मेहनत नहीं दिखी। संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत का उत्साह भी सदन में देखते ही बना। कई मौकों पर उन्होंने आत्मविश्वास में दिखाया।
परिपक्व और सधे अंदाज में नजर आए धामी
युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा सत्र के दौरान सदन के बाहर और सदन के भीतर खासे परिपक्व नजर आए। उन्होंने बेहद सधे अंदाज में अपने विपक्षी सदस्यों को हैंडल किया। बीच-बीच में वह सदन में आए और बड़ी घोषणाएं कर चले गए। इस दौरान कभी भी वह कर्कश नहीं सुनाई दिए। बहुत क्रोधित या खिन्न होने से भी उन्होंने खुद को बचाया। उन्होंने इस आरोप को झुठला दिया कि उनके पास अनुभव की कमी है। वह मध्यमार्ग के रणनीतिकार के तौर पर उभरे।
युवा मुख्यमंत्री पर लगी थीं सबकी निगाहें
युवा मुख्यमंत्री की सदन में भूमिका पर विपक्षी ही नहीं सत्ता पक्ष के विधायकों की भी निगाह लगी थी। सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में विपक्ष के विधायक हरीश धामी और मनोज रावत धरने पर बैठ गए। अनायास वहां पहुंचकर सीएम ने दोनों विधायकों को न सिर्फ मनाया बल्कि एक परिपक्व राजनेता की तरह उन्होंने मुख्य सचिव की मौजूदगी में उनके मसले पर बैठक की। फिर कांग्रेस विधायक ममता राकेश और फुरकान अहमद धरने पर बैठे तो सीएम ने फिर सहृदयता दिखाते हुए उन्हें उसी अंदाज में मनाया और बैठक की। उनकी इस सहजता का ही परिणाम था कि विरोधी खेमों से भी उनकी प्रशंसा के स्वर सुनाई दिए।