उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में इस बार सबसे कम उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। पिछले चार चुनाव से तुलना की जाए तो पता चलता है कि उम्मीदवारों ने मैदान में दम दिखाने की कोशिश की लेकिन 23 छंटनी में छंट गए और 95 ने नाम वापस ले लिए। इस बार चुनाव मैदान में 632 उम्मीदवार ही बचे हैं।
पिछले चार चुनाव में उम्मीदवारों के आंकड़े पर गौर करें तो स्थित स्पष्ट हो जाती है। 2002 के चुनाव में प्रदेश में 927 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इनमें 855 पुरुष और 72 महिलाएं शामिल थीं। इस साल प्रति विधानसभा औसतन 13 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इसके बाद, 2007 के चुनाव में प्रदेश में 785 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इनमें 729 पुरुष और 56 महिलाएं शामिल थीं। इस साल प्रति विधानसभा औसतन 11 उम्मीदवार मैदान में थे।
फिर, 2012 के चुनाव में प्रदेशभर से 788 प्रत्याशी मैदान में उतरे। इनमें 724 पुरुष, 63 महिलाएं और एक अन्य श्रेणी का शामिल था। इस साल चुनाव में प्रति विधानसभा औसतन 11 उम्मीदवार थे। 2017 के चुनाव में प्रदेशभर से 637 मैदान में थे, जिनमें 573 पुरुष, 62 महिलाएं और दो थर्ड जेंडर शामिल थे। प्रति विधानसभा औसतन नौ प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार के चुनाव में 632 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। हालांकि इस साल भी प्रति विधानसभा औसत नौ प्रत्याशी ही हैं।
किस चुनाव में कितने प्रत्याशियों की हुई जमानत जब्त
2002 - 765
2007 - 580
2012 - 614
2017 - 474
31 ऐसे प्रत्याशी जिन पर आपराधिक मुकदमे
इस बार के विधानसभा चुनाव में 31 ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें कांग्रेस के सात, भाजपा के छह, बसपा के पांच, आप के दो, समाजवादी पार्टी के दो, लोक जनतांत्रिक पार्टी के एक, यूकेडी के दो, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का एक और पांच निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव संपन्न कराने को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से गठित प्रेक्षकों के दल ने रविवार को जिला निर्वाचन अधिकारी समेत तमाम आला अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार ने विधानसभा सामान्य निर्वाचन को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियों के संबंध प्रेक्षकों को विस्तार से जानकारी दी।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी विधानसभाओं में 1886 बूथ हैं तथा 943 बूथ पर वेबकास्टिंग की जा रही है। जिले में 18 सखी बूथ तथा दो पीडब्ल्यूडी बूथ बनाए गए है। निर्वाचन कार्मिकों के लिए पहला रेंडमाइजेशन 11 जनवरी दूसरा रेंडमाइजेशन 27 जनवरी को किया गया तथा तीसरा 11 फरवरी को होगा।
जिले में 60 उड़न दस्ते तथा 75 स्थैतिक टीम तैनात है जो 24 घंटे कार्य कर रही है। बैठक में प्रेक्षक (व्यय) दिलीप कुमार एवं नवनीत मनोहर ने प्रत्याशियों के व्यय पर पैनी नजर रखते हुए सोशल मीडिया, पेड न्यूज सहित अन्य प्रचार की सम्पूर्ण गतिविधि पर बारीकी से नजर रखने के निर्देश दिए।
कैमरे से की जाएगी निगरानी
डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी ने बताया कि पूरे जिले को को सुपर जोन, जोन, सेक्टर जोन ने विभाजित किया गया है। विभिन्न स्थानों पर लगाए गए बैरियर पर गहनता से नजर रखी जा रही है तथा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।