मसूरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2012 में निर्दलीय और 2017 में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाली गोदावरी थापली को इस बार भी हाथ का साथ मिला है। गोदावरी थापली 2012 में तीसरे और 2017 में दूसरे नंबर पर रही थीं। मसूरी में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जोत सिंह गुनसोला, राजकुमार जायसवाल, सुमेंदर बोरा, लक्ष्मण सिंह नेगी और सुनीत राठौड़ आदि भी दावेदारी पेश कर रहे थे। कांग्रेस के कद्दावर नेता जोत सिंह गुनसोला की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही थी।
यही कारण है कि टिकट फाइनल होते ही गोदावरी थापली ने मसूरी कांग्रेस भवन में जोत सिंह गुनसोला का आशीर्वाद लेकर यह सार्वजनिक करने की कोशिश भी की कि मसूरी सीट पर उनके चुनाव लड़ने पर कांग्रेस में किसी तरह की कोई नाराजगी नहीं है। बकौल गोदावरी थापली मसूरी में इस बार कांग्रेस बहुत मजबूत स्थिति में है और पार्टी के सभी नेता व कार्यकर्ता अब कांग्रेस को जिताने के लिए जुट गए हैं।
इन सीटों पर यह है स्थिति
सहसपुर में कांग्रेस ने पिछली बार बगावत कर पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले आर्येद्र शर्मा को टिकट दिया है। आर्येंद्र शर्मा पिछली बार किशोर उपाध्याय के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे। इस सीट से कांग्रेस में राकेश नेगी, लक्ष्मी अग्रवाल, गुलजार, विनोद चौहान, अकील अहमद आदि भी दावेदारी जता रहे थे। पार्टी हाईकमान के फैसले के बाद बाकी दावेदार खासे मायूस बताए जा रहे हैं।
चकराता सीट से नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के राजनीतिक कद को देखते हुए उनके नाम पर मुहर लगना लगभग तय था। उनके परिवार की कांग्रेसी पृष्ठभूमि, कई बार के विधायक, प्रदेश अध्यक्ष रहने और फिर नेता प्रतिपक्ष का ओहदा, क्षेत्र के लोगों में अच्छी पकड़ होने के चलते उनकी टक्कर का पार्टी में हाईकमान को दूसरा कोई चेहरा नजर नहीं आया। उनके ऊंचे सियासी कद का ही नतीजा है कि चकराता सीट पर पार्टी में उनकी मुखालफत करने वाला कोई भी सामने नजर नहीं आता है।
विकासनगर सीट पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात को फिर मौका मिला है। पिछली बार वह भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान से हार गए थे। विकासनगर से जिला अध्यक्ष संजय किशोर ने भी दावेदारी की थी, लेकिन नवप्रभात ने बाजी मार ली। इसी तरह कैंट विधानसभा से भले अभी प्रत्याशी घोषित न हुआ हो, लेकिन सूत्रों से जो संकेत मिल रहे हैं उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, युवा नेता वैभव वालिया और राज्य आंदोलनकारी बीरेंद्र पोखरियाल में टिकट के लिए कड़ी टक्कर बताई जा रही है। इसी तरह, ऋषिकेश और डोईवाला सीट पर भी प्रत्याशी घोषित करने को लेकर पार्टी खास रणनीति के तहत और फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है।
कांग्रेस की ओर से जारी किए टिकटों से हरिद्वार की सीट पर तो कोई नाराजगी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। दबी जुबान से टिकट के सभी दावेदार अब पार्टी प्रत्याशी के लिए काम करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन भेल रानीपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस में रार शुरू हो गई है। दावेदारों ने घोषित किए गए प्रत्याशी को पार्टी के बाहर का बताया है। वहीं, आजकल में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने की बात उनकी ओर से कही जा रही है। इससे साफ दिख रहा है कि कुछ दावेदार पार्टी हाईकमान के फैसले से असंतुष्ट नजर हैं। जो अब निर्दलीय भी मैदान में ताल ठो सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी में पूरी आस्था आज भी है। लेकिन जिन लोगों ने मुझे नेता बनाया है। वही बैठक में तय करेंगे कि मुझे क्या करना है। जिसका आजकल में पता चल जाएगा।
- महेश प्रताप राणा, प्रदेश सचिव, कांग्रेस
पार्टी ने कार्यकर्ता को ही टिकट नहीं दिया है। एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया है, जिसने अभी तक के चुनाव में केवल पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया है। अपने लोगों के साथ सोमवार को बैठक करूंगा। इसके बाद संगठन के दायरे में रहकर निर्णय लिया जाएगा।
- वरुण बालियान, यूथ कांग्रेस नेता
सीट पर टिकट वितरण को लेेकर मैं संतुष्ट नहीं हूं। पार्टी हाईकमान को टिकट वितरण को लेकर पुनर्विचार करना चाहिए। समर्थकों के साथ में आजकल में बैठक करूंगा। इसके बाद जो भी समर्थक कहेंगे। उस अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
- संजीव चौधरी, सदस्य, आउटरीच कांग्रेस कमेटी
जो भी पार्टी ने फैसला लिया है, मैं क्या पार्टी के सभी कार्यकर्ता उससे पूरी तरह से संतुष्ट हैं। अब वह पार्टी प्रत्याशी के लिए कार्य करेंगे। जिससे पार्टी प्रत्याशी जीतने से कांग्रेस की सरकार बने सके।
- आलोक शर्मा, राष्ट्रीय प्रवक्ता
पार्टी ने प्रत्याशी को चयन लेकर जो किया है। वह सही है। इसलिए वह अब पार्टी प्रत्याशी के साथ हैं। उन्हें जीताने के लिए काम किया जाएगा।
- अनीता शर्मा, मेयर हरिद्वार