कुछ अवसरों पर विधायक राजकुमार ठुकराल के बड़बोलेपन के कारण पार्टी को असहज भी होना पड़ा। ये सभी उनके टिकट कटने के कारण माने जा रहे हैं। द्वारहाट के विधायक महेश नेगी का भी पार्टी ने टिकट काट दिया। महेश नेगी एक युवती के गंभीर आरोपों के कारण विवादों में रहे। उनके इस विवाद की वजह से पार्टी को असहज होना पड़ा। सियासी जानकारों का मानना है कि बेशक पार्टी ने नेगी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन उनके विवाद की आंच से बचने के लिए उनके टिकट पर कैंची चला दी गई।
भाजपा के इन तीनों विधायकों से जुदा खानपुर के पार्टी विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन थोड़े किस्मत वाले रहे कि उनका पत्ता कटने के बावजूद टिकट घर से बाहर नहीं गया। चैंपियन अपनी बदजुबानी के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे। क्षमा याचना के बाद भाजपा ने उन्हें अभयदान दिया। लेकिन इस चुनाव में उनके चुनाव लड़ने की हसरत पूरी नहीं की। हालांकि चैंपियन अपने और अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन पार्टी ने चैंपियन की जगह उनकी पत्नी कुंवरानी देवरानी को उम्मीदवार बनाया।
हरक को तो पार्टी ने निकाल ही दिया
भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को तो पार्टी से बाहर का रास्ता ही दिखा दिया। सरकार में मंत्री रहते हुए हरक सिंह के बयानों के कारण संगठन और सरकार दोनों को कई बार असहज होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक हरक
की भाजपा से विदाई अनायास नहीं हुई बल्कि इसके पीछे विवादों की लंबी श्रृंखला थी।
भाजपा का सिद्धांत है पहले राष्ट्र, फिर संगठन और उसके बाद व्यक्ति। लेकिन कई व्यक्ति का मैं संगठन से ऊपर होने लगता है। ऐसे अवसर पर पार्टी को संदेश देना होता है।
- डॉ. देवेंद्र भसीन, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा