सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज नहीं एकत्र किए गए और न ही फोरेंसिक साक्ष्य लिए गए। मोबाइल फोन भी जब्त नहीं किए गए। हालांकि राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि इस पूरे मामले से जुड़े हुए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य आदि अदालत के समक्ष जमा हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए थे और कॉल रिकॉर्ड साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने ट्रायल जारी रखने का आदेश देते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई फरवरी में होगी। दरअसल, पीड़ित परिवार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।