शाके 1518 (1596 ई.) के इस ताम्रपत्र को तत्कालीन राजा रुद्रचंद ने तिवारी परिवार के पूर्वज किशलाकर त्याड़ी (तिवारी) को दिया था। इसमें तिखौन पट्टी में उन्हें तीन वीसी (करीब 450 नाली) भूमि दान में देने का आदेश है। भूमि दान के इस ताम्रपत्र में राज परिवार के लखी चंद (राजा रुद्रचंद के पुत्र लक्ष्मण चंद) सहित 16 लोगों को गवाह बनाया गया था। सभी 16 लोगों के नाम भी ताम्रपत्र में दर्ज हैं।
ताम्रपत्र में लिखे विवरण के मुताबिक इसे मानिक सुनार नामक व्यक्ति ने लिखा। बता दें कि राजा रुद्रचंद का कार्यकाल 1565 से 1597 तक माना जाता है जबकि उन्होंने 1596 ई. में यह ताम्रपत्र प्रदान किया। ताम्रपत्र का पता लगाने वाली टीम में डॉ. चंद्र सिंह चौहान के अलावा भास्कर तिवारी, चंद्रशेखर उपाध्याय, फोटोग्राफर रणजीत सिराड़ी आदि शामिल थे।
राजा रुद्रचंद की ओर से 1596 ई. में दिया गया यह ताम्रपत्र करीब 700 ग्राम वजन का है। ताम्रपत्र कुमाऊंनी में लिखा गया है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस ताम्रपत्र को पुरातत्व विभाग में दर्ज करने के साथ ही इस ताम्रपत्र को रजिस्ट्रेशन एवं पुरावशेष अधिकारी कुमाऊं मंडल नैनीताल में भी पंजीकृत किया जाएगा।
पुरातत्व के महत्व की कई दुर्लभ चीजें बिखरीं होने का अंदेशा
माना जा रहा है कि कुमाऊं क्षेत्र में लोगों के पास कई दुर्लभ ताम्रपत्र और अन्य पुरावशेष हो सकते हैं। दरअसल, लोगों को भय रहता है कि इनके बारे में जानकारी मिलने पर उनके पास रखी दुर्लभ चीज जब्त हो जाएगी, जबकि नियम ऐसा नहीं है। डॉ. चंद्र सिंह चौहान के मुताबिक यदि व्यक्ति स्वेच्छा से इसे पुरातत्व विभाग को सौंपना चाहता हो तो बात अलग है अन्यथा इस तरह की कोई भी दुर्लभ चीजें संबंधितव्यक्ति के पास ही रहती हैं। सिर्फ विभाग के पास इनका रिकॉर्ड रहता है।