गुस्ल शरीफ के साथ रविवार को दरगाह साबिर पाक के 752वें उर्स की सभी रस्में संपन्न हो गईं। इस दौरान मजार शरीफ और दरगाह शरीफ को गुलाब जल व केवड़ा जल से नहलाया गया। जायरीनों ने दरगाह के बाहर से ही गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की। इसके साथ ही हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर-ए-पाक की मजार पर अपना सलाम पेश कर अकीदतमंद लौटने की तैयारी में जुट गए हैं।
रविवार को रबीउल अव्वल की 14 तारीख को साबिर पाक के मजार-ए-मुकद्दस और पूरी दरगाह को गुलाब जल, केवड़ा जल से नहलाया गया। सज्जादा नशीन शाह मंसूर एजाज साबरी और नायब सज्जादा नशीन शाह अली एजाज साबरी ने गुस्ल शरीफ की रस्म अदा कराई।
उर्स में पहुंचे सूफियों और जायरीनों ने गुस्ल शरीफ की रस्म में शिरकत की। इस दौरान गुलाब जल की खुशबू से पूरी दरगाह महक उठी। रस्म अदायगी के दौरान सबसे पहले मजार शरीफ में संदल पेश किया गया। इसके बाद गुलाब जल से नहलाया गया।
गुस्ल का पानी जायरीनों को प्रसाद के रूप में दिया गया। इस बार कोविड के चलते दरगाह के अंदर जायरीनों के जाने पर प्रतिबंध है। लिहाजा जायरीनों ने बाहर से गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की और देश में अमन चैन की दुआ मांगी। इसी के साथ उर्स की सभी रस्में संपन्न र्हुइं। हालांकि, उर्स अभी चांद की 20 तारीख तक चलेगा।
इस दौरान शाह काशिफ एजाज, नैयर मियां साहब, शाह खालिक मियां, शाह सुहेल, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद अकरम, नय्यर अजीम फरीदी, शाह यावर, सैयद हाफिज मैराज, सूफी राशिद साबरी, शफीक साबरी, अदील हबीब, सूफी इसरार साबरी, नोमी मियां, बब्बू शाह, समद साबरी, बाबू गुलशाद सिद्दीकी मौजूद रहे।