उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ में दो फाड़ हो गए हैं। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर गुपचुप चुनाव कराने का आरोप लगाते हुए जलकल भवन में जमकर हंगामा किया। बाद में खुद चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी घोषित कर दी। जबकि, दूसरे पक्ष का कहना था कि कोविड गाइडलाइन के मुताबिक कार्यसमिति के बहुमत के आधार पर चुनाव संपन्न कराए गए।
शनिवार को उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ के द्विवार्षिक चुनाव संपन्न होने थे। इसके लिए गढ़वाल व कुमांऊ मंडल से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। आरोप है कि एक पक्ष की ओर से गुपचुप तरीके से चुनाव संपन्न कर नई कार्यकारिणी घोषित कर दी। इसको लेकर चुनाव स्थल राजपुर रोड स्थित जलकल भवन में जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद आरोप लगाने वाले पक्ष ने सभा कर डीपी भद्री को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर चुनाव संपन्न कराए। इसमें संजय जोशी को प्रदेश अध्यक्ष, महेश राम और रामंचद्र सेमवाल को प्रदेश उपाध्यक्ष, लाल सिंह को कोषाध्यक्ष, रमेश बिंजोला को प्रदेश महामंत्री, रमेश चंद्र, धन सिंह नेगी को संयुक्त सचिव, मनोज सक्सेना, राजकुमार अग्रवाल को संगठन मंत्री, केडी भट्ट, धन सिंह बिष्ट को कार्यालय सचिव, दीपक कुमार, संजय कुमार को प्रचार सचिव और संजय मल्होत्रा को मीडिया प्रभार चुना गया। साथ ही श्याम सिंह नेगी को देहरादून मंडल का अध्यक्ष कोमल सिंह बिष्ट और भगवान प्रसाद को उपाध्यक्ष शिशुपाल सिंह रावत को महामंत्री निर्वाचित किया गया। आशीष तिवारी को कोषाध्यक्ष, मणिराम, भारत सिंह को संयुक्त सचिव चुना गया।
वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से गिरीश जोशी को अध्यक्ष, डीडी बलोनी को प्रदेश महामंत्री, हरेन्द्र रौथाण, सचिन शाह को उपाध्यक्ष, दलीप सिंह को कोषाध्यक्ष, दाता राम, रत्नेश को संयुक्त मंत्री, नरेंद्र राजपूत और राजकुमार सिंह संगठन मंत्री, प्रेम सिंह, गोपाल सिंह प्रचार मंत्री, फतेह सिंह और रमाकांत को कार्यालय मंत्री चुना गया। प्रदेश महामंत्री डीडी बलोनी ने कहा कि कोविड गाइडलाइन के कारण कार्यसमिति के बहुमत के आधार पर चुनाव संपन्न कराए गए। गुपचुप चुनाव का आरोप गलत है।