उत्तराखंड शासन ने भले ही अब तक तबादला नियमावली में संशोधन नहीं किया है। मगर शिक्षा निदेशालय में बदली के लिए अध्यापकों ने अपने-अपने तर्क तैयार कर लिए हैं।
ट्रांसफर आवेदनों में कुछ शिक्षिकाओं ने खुद पर जान माल का खतरा बताया है तो कुछ का कहना है कि वे अपने सास ससुर की सेवा करना चाहती हैं।
निदेशालय में भेजे आवेदनों में कुछ शिक्षिकाओं ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में जान माल का खतरा है। उन्हें लगातार धमकियां मिल रहीं है। ऐसे में कहीं और तबादला किया जाए। इसी तरह कुछ परिवार की देखभाल के लिए दून आना चाहती हैं।
सास-ससुर की सेवा के लिए मांगा ट्रांसफर
टिहरी में तैनात एक शिक्षिका दून सिर्फ इसलिए बदली चाहती हैं, ताकि वे सास-ससुर की सेवा कर सकें। पौड़ी की दो शिक्षिकाओं के मुताबिक कार्यस्थल पर उन्हें अराजक तत्वों से खतरा है। धमकियां दी जा रही हैं। वहीं, ऊधमसिंह नगर की एक शिक्षिका ने पति से खुद और बेटियों के लिए खतरा बताया है।
बगैर आवेदन हो रहे थे तबादले
प्रदेश में हाल में जूनियर और बेसिक के जिन 159 शिक्षकों के तबादला आदेश किए गए थे, इनमें 12 ऐसे हैं, जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था। बगैर आवेदन इन शिक्षकों के आदेश जारी कर दिए गए थे।
इस स्तर पर है तबादला प्रक्रिया
तबादला नियमावली संशोधन के लिए प्रस्ताव तैयार है। शिक्षक संगठनों के साथ बैठक के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे आगामी कैबिनेट मीटिंग में मंजूरी मिल सकती है।
15 हजार शिक्षकों ने किया है आवेदन
शिक्षा निदेशालय से शासन को जूनियर और बेसिक के करीब पांच सौ और प्रदेश प्रदेश में इस संवर्ग के शिक्षकों के करीब 15 हजार शिक्षकों ने तबादलों के लिए आवेदन कर रखा है।
ब्लड शुगर है, तबादला कर दो
तबादलों के लिए पुरुष शिक्षकों ने भी अपने तर्क रखे हैं। कुछ का कहना है कि उन्हें ब्लड शुगर है, ऐसे में अनुकूल परिवेश वाले क्षेत्र में ट्रांसफर किया जाए। अधिकतर शिक्षकों ने बीमारी वजह बताई है तो कुछ ने परिस्थितियों को विपरीत माना है।