उत्तराखंड की वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर आज डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भवन सचिवालय में उत्कृष्ट एवं साहसिक कार्यों के लिए 21 बालिकाओं और महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। इस दौरान 22 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का भी सम्मान किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वीरांगना तीलू रौतेली के जन्मदिवस पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्त्री शक्ति तीलू रौतेली पुरस्कार वितरण के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी पुरस्कार विजेताओं को संबोधित कर बधाई दी।
21 बालिकाओं और महिलाओं में अल्मोड़ा से प्रीति भंडारी, शिवानी आर्य, बागेश्वर से गुंजन बाला, चंपावत से जानकी चंद, चमोली से शशि देवली, देहरादून से उन्नति बिष्ट, संगीता थपलियाल, गीता मौर्या, हरिद्वार से पुष्पांजलि अग्रवाल, नैनीताल से कंचन भंडारी, मालविका माया उपाध्याय, पिथौरागढ़ से सुमन वर्मा, शीतल पौड़ी गढ़वाल से मधु खुगशाल टिहरी गढ़वाल से कीर्ति कुमारी, रुद्रप्रयाग से बबीता रावत, सुमती थपलियाल, ऊधमसिंह नगर से ज्योति उप्रेती अरोड़ा, मीनू लता गुप्ता, चंद्रकला राय और उत्तरकाशी से हर्षा रावत शामिल हैं।
इसके अलावा 22 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। जिसमें अल्मोड़ा से नीता गोस्वामी, गीता देवी, बागेश्वर से पुष्पा, चंपावत से हेमा बोरा, चमोली से अंजना रावत, देहरादून से हयात फातिमा, सुधा, सीमा, हरिद्वार से पूनम, सुमनलता यादव, असमा, नैनीताल से गंगा बिष्ट, समारेज, निर्मला पांडे, पिथौरागढ़ से चंद्रकला, पौड़ी से अर्चना देवी, रोशनी, रुद्रप्रयाग से सुशीला देवी, टिहरी गढ़वाल से लक्ष्मी देवी, ललिता देवी, उत्तरकाशी से कुसुम मेहर और बीना चौहान शामिल हैं।
वीरांगना तीलू रौतेली
तीलू रौतेली उत्तराखंड की ऐसी वीरांगना है जो केवल 15 साल की उम्र में रणभूमि में कूद गई थी। सात साल तक उन्होंने दुश्मन राजाओं को कड़ी चुनौती दी। 15 से 20 साल की आयु में सात युद्ध लड़ने वाली तीलू रौतेली विश्व की एकमात्र वीरांगना है, जिनकी जयंती पर प्रदेश सरकार की ओर से उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को हर साल पुरस्कृत किया जाता है।