प्रदेश सरकार को कोविड-19 फंड के लिए विधायकों के 30 प्रतिशत वेतन कटौती को लेकर अध्यादेश लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विधायकों ने कंजूसी छोड़ अब अपने भत्तों को कटवाने के सहमति पत्र देने शुरू कर दिए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी पार्टी के सभी विधायकों से वेतन के साथ भत्तों की कटौती करने की अपील की है।
उन्होंने इस संबंध में उन्हें पत्र भी लिखा है। भगत स्वयं विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को भत्तों की कटौती को लेकर सहमति पत्र सौंप चुके हैं। बकौल भगत, जानकारी के अभाव में 30 फीसदी भत्तों की कटौती नहीं कराई जा सकी थी। अब सभी विधायकों को भत्ते कटौती को लेकर सहमति देने को कहा गया है।
खुलासे से असहज थी भाजपा
कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने आरटीआई से सूचना प्राप्त कर खुलासा किया था कि कांग्रेस विधायकों के वेतन और भत्तों से 30 फीसदी कटौती हो रही है, लेकिन सत्तारूढ़ दल के कई विधायक केवल मूल वेतन से ही 30 प्रतिशत कटौती करा रहे हैं। इसे लेकर सियासत गरमायी। कांग्रेस ने तानेबाजी से भाजपा असहज दिखी। पार्टी की ओर से कहा गया कि कैबिनेट के फैसले को समझने में चूक हुई।
सरकार ने अध्यादेश लाने की बात कही
इस बीच 30 फीसदी कटौती का फैसला लेने वाली प्रदेश सरकार भी असहज दिखी। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक का बयान आया कि यदि जरूरत पड़ेगी तो सरकार वेतन भत्तों की कटौती को लेकर अध्यादेश लाएगी। अध्यादेश लाकर सरकार वेतन भत्तों की कटौती में एकरूपता लाना चाहती है लेकिन अब इसकी जरूरत शायद नहीं पड़ेगी।
अब तक इन विधायकों ने दिए सहमति पत्र
बंशीधर भगत (कालाढुंगी), पूरन फर्त्याल (लोहाघाट), प्रदीप बतरा रुड़की), दीवान सिंह बिष्ट (रामनगर)