मंगलवार शाम गंगा-आरती से ठीक पहले हरकी पैड़ी से सटे आर्च पुल के नीचे डूबकर तीन युवकों की मौत होने से कोहराम मच गया। दो युवकों को बचा लिया गया। सभी लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं और सोमवार को हरिद्वार घूमने आए थे। पुलिस ने घटना की सूचना परिजन को दे दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार लखीमपुर खीरी के कुछ युवक सोमवार को हरिद्वार घूमने आए थे। मंगलवार को सांध्यकालीन आरती के समय यह युवक हरकी पैड़ी के पास आर्च पुल के नीचे गंगा में नहा रहे थे। नहाते समय पांच युवक गंगा में डूबने लगे। युवकों को गंगा में डूबते देख आसपास के लोगों ने शोर मचाया। शोर सुनकर पुलिसकर्मी अमित कुमार, हरीश पुरोहित, दिनेश चौधरी मौके पर पहुंचे। इसके बाद आमजनों की मदद से गंगा में डूब रहे पांच युवकों को जैसे-तैसे बाहर निकाला।
अचेतवस्था में रहे तीन युवकों को पुलिसकर्मी आनन फानन में जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं करंट लगने से भी युवकों के डूबने की चर्चा हो रही है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
लखीमपुर खीरी से घूमने आए थे सभी युवक
घटनास्थल का निरीक्षण करते डीएम, एसएसपी।
- फोटो : AmarUjala
सूचना मिलने पर एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर, कोतवाली प्रभारी महेंद्र सिंह नेगी, एसएसआई गिरिश चंद्र शर्मा भी जिला अस्पताल पहुंच गए। डूबने से बच गए युवक गोपी एवं पवन ने पुलिस को अपने साथियों के नाम ज्ञानू, छोटू उर्फ ओमकार एवं हेमू बताए।
बताया कि वे सब लखीमपुर खीरी के बहादुरनगर के रहने वाले हैं और सभी रेडीमेड गारमेंटस के धंधे से जुड़े है। सोमवार को वे सब यहां पहुंचे थे और मृतक ज्ञानू उनकी कार का चालक है। एसपी सिटी ने बताया कि सभी की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है।
डूबने की बात से हर कोई सन्न
लोगों से भरी रहने वाली हरकी पैड़ी पर युवकों के डूब जाने की घटना से एक बारगी हर कोई हतप्रभ रह गया। बताया यह जा रहा है कि घटनास्थल पर एक गहरा गड्ढा भी है। आशंका जताई जा रही है कि इसी में डूबने से मौत हुई है। लेकिन इसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है क्योंकि, इस समय पानी बेहद ही कम है।
हादसे की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश, एक लाख मुआवजा
हरकी पैड़ी पुल पर लटके नंगे तार
- फोटो : AmarUjala
गंगा में डूबे युवकों की मौत करंट लगने की बात सामने आने के बाद जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने हादसे की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए नगर मजिस्ट्रेट जयभारत सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि शासन स्तर पर वार्ता की है। मृतकों के परिवारों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
डूबने से बाल-बाल बचे गोपी की माने तो वे आर्च पुल पर बंधी जंजीरों को पकड़कर खड़े थे। शाम होते ही जब अचानक लाइटों की रोशनी हुई तभी उन्हें करंट का झटका सा महसूस हुआ। फिर वे डूबने लग गए।
बकौल गोपी की उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ नहीं पता। कुछ लोगों ने उसे पानी से बाहर निकाला, यह उसे याद है। पर, पुलिस अफसर करंट की बात को अभी बिलकुल सही नहीं मान रहे है क्योंकि उनका मानना है कि यदि करंट लगा होता तो कई अन्य लोग भी उसकी चपेट में आए होते।