उत्तराखंड में जनता जनार्दन की मुसीबत तय है। मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी शुक्रवार से दो दिन के लिए कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
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इसमें प्रदेश के 44 विभागों के 32 हजार कर्मचारी शामिल होंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मांग नहीं मानी गई तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद दो दिन का कार्य बहिष्कार फिर होगा।
इसके बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल की ठान ली है। साफ है कि आचार संहिता के बाद कामों में तेजी आने का इंतजार कर रहे लोगों को इस कदम से साफ झटका लगेगा।
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उत्तरांचल फेडरेशन आफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी दफ्तर में दस्तखत करने के बाद सुबह 11 बजे परेड ग्राउंड में एकत्र होंगे। यहां सभा की जाएगी।
मांगों को लेकर बैठक की
एसोसिएशन की कार्य समिति की बृहस्पतिवार को लोक निर्माण विभाग के संघ भवन में हुई बैठक में भी वक्ताओं ने मांगों पर आवाज उठाई।
बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष टीएस पुंडीर, प्रांतीय महामंत्री सुनीलदत्त कोठारी, जेपी सकलानी, आरपी जुयाल, पूर्णानंद नौटियाल, मनोहर कुमार मिश्र, परमानंद चमोली आदि रहे।
सरकार की तरफ से कोई कोशिश नहीं कर्मचारियों को पहले भी सरकार की तरफ से इन मांगों पर आश्वासन मिले हैं।
लेकिन अबकी उनके कार्य बहिष्कार पर जाने के ऐलान के बावजूद सरकार की तरफ से उन्हें मनाने की कोई कोशिश नहीं की गई।
इस पर बात पर सभी पदाधिकारी उखड़े नजर आए। उनका कहना था कि प्रदर्शन को कार्य का आधार मानने का दावा करने वाली सरकार कर्मचारियों को मांगों पर उपेक्षित महसूस करा रही है।
कलेक्ट्रेट, तहसील, सिंचाई, वन विभाग, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, ग्राम्य विकास, वेतन विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण, लघु सिंचाई, जलागम, शिक्षा, अर्थ एवं सांख्यिकी समेत 44 विभाग।
इनमें कार्य बहिष्कार नहीं नगर निगम, एमडीडीए, वन निगम, जल निगम, जलसंस्थान, गढ़वाल मंडल विकास निगम समेत अन्य कारपोरेशन।
यह हैं प्रमुख मांगें - कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक, प्रधान सहायक, प्रशासनिक अधिकारी का वेतनमान संशोधित किया जाना। - एक कार्यालय में 10 मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों के मानक को शिथिल करते हुए सभी कार्यालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद सृजित किए जाएं। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का पदनाम उपनिदेशक (प्रशासन किया जाए)।
- मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के शिथिलीकरण का अधिकार शासन के स्थान पर विभागाध्यक्ष को दिया जाए। - नायब तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक, खंड विकास अधिकारी, सहायक सेवा योजन अधिकारी, उप शिक्षाधिकारी आदि पदों पर पदोन्नति के लिए 50 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाए।
- केंद्रीय कर्मचारियों की तरह मिनिस्ट्रीयल कर्मियों को यातायात भत्ता दिया जाए।