इसके अलावा यह खांसी, जुकाम, नाक, पेट के कीड़े, त्वचा संक्रमण, आंखों का संक्रमण, दमा, गठिया, फेफड़ों, फफूंदी जनित, यकृत जन्य बीमारियों, शरीर शुद्धीकरण, जिगर की सूजन, गर्भाशय के संकुचन, कब्ज, दस्त आदि के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बताया कि इंसुलिन पौधे (कोस्टस) की दो पत्तियों को पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम पीने पर मधुमेह दूर होता है।
वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. डीएस रावत ने बताया कि यह औषधीय पौधा इंसुलिन को बढ़ाने में लाभदायक है। हिमालयी क्षेत्रों में खेती के लिए अनुकूल भी है। वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुमित पुरोहित ने बताया कि कोस्टस पिकटस का भारत के अलावा अन्य देशों में शोध चल रहा है। जैव प्रौद्योगिकी भी नर्सरी तैयार कर रहा है।