स्मार्ट सिटी पर दो बार मुंह की खाने के बाद अभी भी उत्तराखंड सरकार का बहुराष्ट्रीय कंसलटेंट कंपनी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) से मोह नहीं छूट रहा। यह कंपनी स्मार्ट सिटी के लिए सारी कवायद कर रही है। लेकिन, यह केंद्र सरकार के मानकों पर खरी नहीं उतर पाई है। 30 जून को दिए जाने वाले प्रस्ताव में भी इसी कंपनी को ही मसौदा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।
कंपनी ने दी सफाई
इस पर प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के बारे में मानक तय नहीं हैं। यह सब कुछ शहरी विकास मंत्रालय के स्मार्ट सिटी सेक्शन के अधिकारियों व विशेषज्ञों के विवेक पर निर्भर है। उनके मानक बदलते रहते हैं और नजरिया भी समान नहीं रहता।
स्मार्ट सिटी में सेलेक्शन न होने के लिए कंसलटिंग कंपनी को दोष देना ठीक नहीं है। हमारी सीमित भूमिका रहती है। मेयर विनोद चमोली ने कहा कि पहले वाले प्रस्ताव के बाद हम 100 में से 97 नंबर पर थे। इस बार 23 शहरों में हम 17 वें स्थान पर हैं। पहले से हमारी रैंकिंग बहुत बेहतर हुई है। इस बार कंसलटेंट की भूमिका को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।