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गंभीर मरीजों के इलाज में रेडियोलाजी की भूमिका अहम

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वर्ल्ड रेडियोलॉजी डे के मौके पर सोमवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने मरीजों के इलाज में रेडियोलोजी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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मेडिकल कालेज के डॉक्टरों, छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना ने कहा कि आज के दिन 1895 को जर्मन वैज्ञानिक विल्हेम कोनराड रोंटजेन द्वारा एक्सरे की खोज की गई थी। तब से रेडियोलोजी ने पूरी दुनिया में चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। रेडियोलोजी के विकास से ना सिर्फ विशेषज्ञ चिकित्सकों को मरीजों के इलाज में सहूलियतें हुईं, वरन रेडियोलोजी ने बीमारी से जुड़े उन तमाम पहलुओं को भी उजागर किया जो चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए समझ से परे थी।
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत ने कहा कि रेडियोलॉजी ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अपना अहम योगदान दिया है। रेडियोलॉजी के जरिए विशेषज्ञ जो रिपोर्ट तैयार करते हैं उसी के आधार पर चिकित्सकों को मरीजों के इलाज में आसानी हो जाती है। रेडियोलॉजी विभाग किसी भी अस्पताल में रीड की हड्डी है। कॉलेज प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना के अलावा डॉ. एनएस खत्री, डॉ रविकांत, डॉ. अभय प्रताप, महेंद्र भंडारी, अभय नेगी, बसंती नेगी, विमल भट्ट, सचिन वर्मा, जसलीन कौर, आनंद रावत व रेडियोलाजी के मेडिकल छात्र उपस्थित रहे। इस मौके पर मेडिकल छात्रों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। सेमिनार में रेडियोलोजी छात्रों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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बता दें, वर्ल्ड रेडियोलॉजी डे पर इस बार की थीम इंटरनेशनल रेडियोलॉजी-रोगी के लिए सक्रिय देखभाल रखी गई है। वैसे तो एक्सरे की खोज आठ नवंबर 1895 को की गई थी और एक्स-रे की खोज के साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में रेडियोलाजी की शुरुआत भी कर दी गई, लेकिन वर्ल्ड रेडियोलॉजी डे मनाने 2012 से शुरू हुई।
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