Iजिला अदालत ने मंगलवार को एक सरकारी विभाग के तत्कालीन अनुभाग अधिकारी को महिला की अस्मिता से खिलवाड़ करने और छेड़खानी के आरोप से बरी करने का फैसला सुनाया। अनुभाग अधिकारी के खिलाफ अधीनस्थ महिलाकर्मी ने साल 2014 में कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। महिला कार्यालय में टाइपिंग का काम करती थी। उन्होंने पहले विभाग के उप महाप्रबंधक की निगरानी में बनी यौन उत्पीड़न एवं निवारण समिति के सामने शिकायत दी। फिर पुलिस को बयान देकर मुकदमा दर्ज करवाया।
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Iमहिला का आरोप था कि अनुभाग अधिकारी जून 2012 से उनके साथ छेड़खानी करते आ रहे हैं। टाइपिंग कराते समय अक्सर छेड़खानी करते हैं। अदालत में मार्च 2023 से मामले की सुनवाई शुरू हुई। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह भंडारी ने निर्णय में कहा कि महिला ने आरोपी के कथित कृत्य के खिलाफ दो साल बाद पहली बार पुलिस को शिकायत दी। देरी की वजह भी नहीं बताई। महिला के बयान विश्वसनीय प्रकृति के प्रतीत नहीं होते। अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम रहा।I