उच्चतम न्यायालय की ओर से स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य मान लेने के बाद से उनका पलड़ा भारी हो गया है।
अब शारदा और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य पदों पर आसीन स्वरूपानंद अब एक पद त्याग कर उस पर किसी अपने समर्थक संत को आसीन कर सकते हैं। लेकिन दस नाम संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े को स्वामी वासुदेवानंद की हार से गहरा धक्का लगा है।
पहले सिविल कोर्ट और उच्च न्यायालय में वासुदेवानंद सरस्वती के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। इसके खिलाफ स्वरूपानंद सरस्वती उच्चतम न्यायालय गए तो न्यायालय ने पुन: वह मामला जिला कोर्ट को भेज दिया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने वासुदेवानंद को सिरे से खारिज कर स्वरूपानंद को ही ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य मान लिया।
स्वरूपानंद लंबे अरसे से शारदा और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य पदों पर आसीन हैं। उन्होंने कईं बार कोशिश की थी कि कोई एक पद छोड़ दिया जाए। लेकिन प्रकरण न्यायालय में होने के कारण वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे। अब उनके कृपा पात्र स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।