संदिग्धों के लिए कांबिंग अभियान चलाती टीम
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ऊधमसिंह नगर स्थित ध्यानपुर के जंगल में एक दर्जन हथियारबंद संदिग्धों के देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। खुफिया विभाग द्वारा जानकारी मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में खटीमा, झनकईया व नानकमत्ता पुलिस के साथ ही एसओटीएफ, एटीएफ व पीएसी ने रंसाली के जंगलों में सघन कांबिंग अभियान चलाया। परंतु, संदिग्धों का कोई पता नहीं चला।
शनिवार रात ध्यानपुर के जंगल में एक दर्जन हथियारबंद संदिग्ध लोग दिखाई दिए। हथियारबंद लोगों ने ध्यानपुर गांव के एक दुकानदार से तंबाकू ली। रविवार देर शाम संदिग्ध फिर गांव की मीट की दुकान पर पहुंचे व आठ किलो मीट खरीदकर फिर जंगल में घुस गए। संदिग्धों को गांव में देखे जाने से हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर स्थानीय अभिसूचना इकाई द्वारा ध्यानपुर पहुंचकर मामले की जांच की गई।
एएसपी के निर्देशन में चल रहा कांबिंग अभियान
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उच्चाधिकारियों के मामला संज्ञान में आने पर मंगलवार को जिला मुख्यालय से दो प्लाटून 31वीं व 46वीं पीएसी, एसओटीएफ, एवं वन कर्मियों के साथ ही खटीमा, झनकईया थाने से भारी फोर्स पहुंची।
एएसपी पंकज भट्ट के निर्देश में पुलिस की दो टीमों का गठन किया गया। एक टीम का नेतृत्व सीओ खटीमा आरएस टोलिया व दूसरी टीम का नेतृत्व झनकईया थानाध्यक्ष नरेश पाल ने किया।
एएसपी थाने में मौजूद रह कांबिंग अभियान पर नजर बनाए हुए थे। टीमों ने जंगल में जानवर चुगा रहे ग्रामीणों के साथ ही वन गुजरों से भी पूछताछ की। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की एक टीम लौटी नहीं थी। पुलिस संदिग्धों के माओवादी होने की आशंका को ध्यान में रखकर भी नजर रख रही है।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं माओवादी
माओवादी
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नानकमत्ता के जंगल नेपाल से लगती सीमा के चलते काफी संवेदनशील हैं। नेपाल से खुली सीमा एवं कई चोर रास्तों के चलते नेपाल के माओवादी नेपाल सरकार द्वारा सख्ती करने पर भारत के जंगलों की ओर आ जाते हैं।
2004 में पुलिस द्वारा हंसपुर खत्ता के 100 फिटिया में माओवादियों का कैंप पकड़ा था। कैंप से माओवादी सहित व भारी मात्रा में हथियार बरामद करने के साथ ही प्रशिक्षण लेते एक दर्जन माओवादी पकड़े गए थे। 2007 में भी पुलिस ने माओवादी सरगना प्रशांत राही को गिरफ्तार किया था।