नमामि गंगे की तर्ज पर अब यमुना बेसिन को भी विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नमामि यमुने परियोजना को नमामि गंगे के साथ जोड़ दिया है।
नमामि गंगे के लिए कार्य कर रही केंद्रीय निर्माण एजेंसी वेप्कॉस को ही नमामि यमुने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब दोनों परियोजनाएं साथ-साथ चलेंगी। वेप्कॉस ने यमुना बेसिन का सर्वे करके रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है।
नमामि यमुने परियोजना के तहत यमुनोत्री धाम से इलाहाबाद (यूपी) तक यमुना बेसिन में कार्य किया जाएगा। बता दें कि नमामि गंगे परियोजना के फाइनल होने के बाद ‘अमर उजाला’ ने नमामि यमुने परियोजना का मुद्दा उठाया था।
इस पर केंद्र सरकार ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को नमामि यमुने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए थे। अब एफआरआई ने यमुना बेसिन में वनीकरण के संबंध में डीपीआर का काम शुरू कर दिया है।
केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के लिए कार्य कर रही केंद्रीय निर्माण एजेंसी वेप्कॉस को ही नमामि यमुने की भी जिम्मेदारी दे दी है। इसके बाद वेप्कॉस ने यमुनोत्री धाम, जानकी चट्टी आदि क्षेत्रों का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है। परियोजना के तहत यमुना के साथ इसकी सहयोगी नदियों के बेसिन में भी कार्य किया जाएगा।
उत्तराखंड, यूपी, दिल्ली और हरियाणा में यमुना बेसिन को कवर करेगी
यमुना
- फोटो : अमर उजाला
श्रीयमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल ने बताया कि वेप्कॉस के आला अधिकारियों ने यमुना बेसिन का निरीक्षण कर लिया है। परियोजना का बोर्ड भी लग गया है। जैसा कि बताया गया है, यह परियोजना उत्तराखंड, यूपी, दिल्ली और हरियाणा में यमुना बेसिन को कवर करेगी।
नमामि यमुने परियोजना का साइट सर्वे पूरा हो गया है। रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है। जैसे ही बजट आवंटन की प्रक्रिया पूरी होगी, कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
- सिद्धार्थ, प्रोजेक्ट इंजीनियर, वेप्कॉस
नमामि यमुने के संबंध में केंद्र सरकार का पत्र आ गया है। अभी नमामि गंगे की डीपीआर बनाने में लगे हैं। इसके फाइनल होते ही इस दिशा में काम शुरू कर देंगे।
- डा. ओमवीर सिंह, वरिष्ठ विज्ञानी वन अनुसंधान संस्थान
नमामि यमुने परियोजना - एक नजर
- आरती घाटों का निर्माण
- पुराने घाटों का पुनरुद्धार
- यमुना किनारे प्रतीक्षालय
- नए कुंडों का निर्माण होगा
- सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे
- हाईटेक शौचालय बनेंगे
- यमुना बेसिन में वनीकरण
- तट बंधों का निर्माण होगा
- गांवों में कचरा डंपिंग जोन
यमुनोत्री से संगम इलाहाबाद तक यमुना की लंबाई 2450 किमी