चकराता में पिछले वर्ष हुए सड़क हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर सड़कों पर सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम करने को कहा है।
पिछले साल 31 अक्तूबर को चकराता में हुए हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति ने रिपोर्ट तलब की थी। राज्य की ओर से भेजे गए जवाब के आधार पर समिति ने सचिव परिवहन को पत्र भेजा। इसमें कहा गया कि जितनी भी दुर्घटना प्रभावित सड़कें हैं, वहां के इंजीनियरिंग डिफेक्ट को पहचानकर दूर किया जाए।
सभी ऐसी खतरनाक सड़कों पर रोड साइन और मार्किंग की जाए। क्रैश बैरियर लगाने के साथ ही यातायात को सुरक्षित करने के उपाय किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि हर हाल में प्रदेशभर में ओवर स्पीड के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
इस आदेश के आधार पर उत्तराखंड सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी के अध्यक्ष सुधांशु गर्ग ने सोमवार को पुलिस उप महानिरीक्षक और निदेशक यातायात पुलिस मुख्यालय, सभी आरटीओ प्रवर्तन और एआरटीओ प्रवर्तन को ओवर स्पीड पर नियंत्रण के लिए सख्ती से कार्रवाई करने का पत्र भेजा है।
दूसरी ओर, उन्होंने लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर, एनएच के चीफ इंजीनियर, शिवालिक परियोजना के कमांडेंट बीआरओ, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रीजनल ऑफिसर, एनएचआईडीसीएल और पीएमजीएसवाई के चीफ इंजीनियर को पत्र भेजकर सभी दुर्घटना प्रभावित सड़कों की इंजीनियरिंग जांच कर कमियां दूर करने, रोड साइन और मार्किंग के साथ ही क्रैश बैरियर लगाने को भी कहा है।
यह था मामला
31 अक्तूबर 2021 को चकराता के सुदूरवर्ती इलाके में त्यूणी रोड पर सुबह करीब 10 बजे हादसा हुआ था। चकराता के भरम खत के बायला गांव से विकासनगर जा रही बोलेरो सुबह बायला-पिंगुवा मार्ग पर गांव से आगे अनियंत्रित होकर 400 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। वाहन में 15 लोग सवार थे, जिनमें से 13 लोगों की मौत हो गई थी और दो लोग गंभीर घायल हो गए थे। इस हादसे का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में तेज गति से वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के साथ ही सड़कों की कमियों को दूर करने और सुरक्षा उपाय करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा है।
- सुधांशु गर्ग, अध्यक्ष, लीड एजेंसी