उत्तराखंड में चल रही विद्युत परियोजनाओं पर केंद्र को उसके ढुलमुल रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फिर फटकार लगाई और स्वीकार्य योग्य समाधान पेश करने की हिदायत दी।
कोर्ट ने कहा कि हम बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं, लिहाजा कारगर कदम उठाने की जरूरत है। जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन का सबसे सस्ता माध्यम हैं, इसकी जरूरत भी है।
अगर इन परियोजनाओं से पर्यावरण को खतरा था तो इन्हें वन और पर्यावरण की मंजूरी क्यों दी गई और सरकार फिर इन्हें रद्द क्यों नहीं कर रही है। अदालत ने यह भी पूछा कि सरकार उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने के बारे सोच रही है, जिन्होंने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। क्या ये अधिकारी अब भी उसी विभाग में बने हुए हैं।
अदालत ने केंद्र को इस संबंध में और अध्ययन करने और ऐसा हल निकालने के लिए कहा है, जिससे पर्यावरण पर असर न पड़े। अदालत ने इन परियोजनाओं के भविष्य के बारे में अटॉर्नी जनरल को मदद करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि यह सब आपका (केंद्र का) ही किया धरा है।