बृहस्पतिवार से भगवान सूर्य नारायण सिंह राशि छोड़कर कन्या राशि में प्रविष्ट हो जाएंगे। इसी दिन वर्षा ऋतु का समापन होगा और शरद ऋतु प्रारंभ हो जाएगी। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करते ही ग्रह नक्षत्रों की चाल भी बदल जाती है।
भगवान भास्कर एक महीना पहले जब सिंहस्थ हुए थे, तब नासिक कुंभ प्रारंभ हुआ था। यह अनोखा संयोग है कि नासिक कुंभ के लिए गुरु और सूर्य दोनों को ही सिंहस्थ होना पड़ता है। गुरु फिलहाल सिंह राशि में रहेंगे, लेकिन ऋतु बदलने के लिए भगवान सूर्य नारायण कन्यागत हो जाएंगे।
इस बार कन्या राशि में प्रवेश करने के दिन स्वाति नक्षत्र पड़ रहा है। चंद्रमा तुला राशि के रहेंगे। शरद ऋतु के लिए ऐसा योग शुभ माना जाता है।