नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर डग्गामारी और ओवरलोडिंग कर रहे वाहनों के चेकिंग अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 9.30 बजे एआरटीओ की ओर से की गई कार्रवाई से शहर के विक्रम संचालक आग बबूला हो गए। माजरा में दो विक्रमों का फुटकर में सवारी बैठाने पर चालान काटे जाने से नाराज विक्रम संचालकों ने एआरटीओ से धक्कामुक्की की।
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उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ का प्रयास किया। इसके बाद माजरा में जाम लगाया। इस दौरान यहां से जा रही बस के चालक को भी पीट डाला और बस के शीशे तोड़ दिए। मौके पर पुलिस को पहुंचता देख विक्रम संचालक वहां से परेड ग्राउंड चले गए। इसके बाद एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए हड़ताल कर आरटीओ में हंगामा काटा।
मंगलवार सुबह एआरटीओ प्रवर्तन रामप्रकाश राठौर ने माजरा में दो विक्रमों का फुटकर में सवारी बैठाने और एक सिटी बस का ओवरलोडिंग में चालान किया। इस कार्रवाई से बौखलाए विक्रम संचालकों ने माजरा में एआरटीओ की गाड़ी को घेर तोड़फोड़ का प्रयास किया। विरोध पर एआरटीओ राठौर से हाथापाई भी की।
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बवाल बढ़ता देख माजरा पार्षद रईस अहमद, मकबूल अहमद, मंसूर आदि लोगों ने सूझबूझ का परिचय देकर मामला शांत कराया। हालांकि, इसके बाद विक्रम संचालकों ने शिमला बाईपास पर जाम लगा दिया। इस बीच डाट काली मंदिर से एमडीडीए डालनवाला जा रही सिटी बस यूए 07 एन 9510 को रोक लिया।
सिटी बस चालक को पीटा, बुरी तरह किया घायल
विरोध करने पर विक्रम संचालकों ने बस के चालक दीपक को पीटकर बुरी तरह घायल कर दिया और बस में तोड़फोड़ कर दी। पूरे घटनाक्रम की सूचना पाकर पटेलनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बवाल कर रहे लोग पुलिस को देख वहां से फरार हो गए। पुलिस ने घायल चालक को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया।
इसके बाद विक्रम संचालकों ने 1, 2, 3 और 5 नंबर विक्रमों की हड़ताल कर दी। परेड ग्राउंड में विक्रम खड़े कर आरटीओ कार्यालय पहुंचे और विक्रम जनकल्याण समिति के अध्यक्ष सतीश शर्मा, सुरेश पंत, राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में आरटीओ का घेराव किया। विक्रम संचालकों ने हंगामा और प्रदर्शन कर एकतरफा कार्रवाई, सिटी बसों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
इसके साथ ही विक्रमों को जल्द स्टेज कैरिज परमिट देने की मांग की। सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्र और आरटीओ दिनेशचंद पठोई ने समिति के नेताओं से एआरटीओ राठौर के साथ हुई घटना की निंदा कर सख्त नाराजगी जताई। आरटीओ ने विक्रम संचालकों की मांग को आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की मीटिंग में रखने का आश्वासन भी दिया। इसपर यूनियन के नेताओं ने घटना पर अफसोस जताया और हड़ताल वापस ली।
हाईकोर्ट ने दिए थे अभियान चलाने के आदेश
बीते दिनों शहर में डग्गामारी और ओवरलोडिंग की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन, परिवहन निगम, संभागीय परिवहन कार्यालय और पुलिस को चेकिंग अभियान चलाने का आदेश दिया था। आदेश में खास तौर पर विक्रम संचालकों की ओर से फुटकर में सवारी बैठाने पर कार्रवाई करने को कहा गया था।
इसके बाद आरटीओ दिनेश पठोई के निर्देशन और एआरटीओ प्रवर्तन रामप्रकाश राठौर के नेतृत्व में पीटीओ ज्योति शंकर मिश्रा, रत्नाकर सिंह, एआरएम पूजा केहरा, प्रतीक जैन की टीम कई दिन से शहर में चेकिंग अभियान चला रही थी।
सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस एआरटीओ रामप्रकाश राठौर ने पटेलनगर थाने में 5 नंबर रूट के विक्रमों के प्रधान हरिओम चौधरी को नामजद करा कुछ अज्ञात लोगों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, अभद्रता करने का केस दर्ज कराया है। पुलिस नामजद की तलाश और अज्ञात लोगों को चिह्नित करने में लगी है।
वीडियो क्लिप से होगी भीड़ में शामिल लोगों की पहचान एआरटीओ की गाड़ी में तोड़फोड़ का प्रयास और उनसे अभद्रता कर रही भीड़ की वीडियो क्लिप उनकी टीम में शामिल एक सिपाही ने बना ली। आरटीओ ने क्लिप पुलिस को मुहैया कराने की बात कही है।
हड़ताल के बाद विक्रम संचालकों के मुख्यमंत्री आवास कूच करने की अफवाह भी उड़ी। इससे जिला प्रशासन की सांस फूल गई। सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्र, एलआईयू की टीम और भारी पुलिस बल परेड ग्राउंड पहुंच गया। हालांकि, संचालकों ने सीएम के नाम एक ज्ञापन आरटीओ को ही सौंप दिया। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
प्री-प्लान तो नहीं था माजरा का माजरा? चेकिंग अभियान में कार्रवाई के तुरंत बाद भारी संख्या में विक्रम संचालकों के एकत्र होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चाएं हैं कि एआरटीओ पहले से विक्रम संचालकों के निशाने पर थे। यही वजह रही कि दो विक्रमों का चालान होने के कुछ देर में ही विक्रम संचालकों ने भारी हंगामा कर दिया। सूत्रों की माने तो समिति के एक नेता का इसमें अहम रोल रहा। इस नेता की आरटीओ कार्यालय में एआरटीओ से तीखी नोकझोंक भी हुई।
हड़ताल से यात्री हलकान, सड़कें दिखीं खाली-खाली विक्रमों की हड़ताल से यात्री हलकान रहे। सुबह करीब 9.30 बजे से लेकर दोपहर करीब 1.30 बजे तक कई रूटों के विक्रम नहीं चले। इसके चलते बस और ऑटो में अत्यधिक भीड़ होने पर यात्रियों को पैदल ही सफर करने पर मजबूर होना पड़ा।